कोरोना और चुनाव
देश में कोरोना वायरस ने फिर से अपनी रफ्तार पकड़ ली है। इस बीच चुनाव आयोग ने संकेत दिए हैं कि होने वाले विधानसभा चुनाव समय पर होंगे। पिछले 24 घंटों के दौरान देश में कोरोना के 13,154 नए मामले सामने आए हैं, जबकि अब तक कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रान के कुल 961 मामले …
देश में कोरोना वायरस ने फिर से अपनी रफ्तार पकड़ ली है। इस बीच चुनाव आयोग ने संकेत दिए हैं कि होने वाले विधानसभा चुनाव समय पर होंगे। पिछले 24 घंटों के दौरान देश में कोरोना के 13,154 नए मामले सामने आए हैं, जबकि अब तक कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रान के कुल 961 मामले दर्ज हुए हैं। एक तरफ चुनाव हैं तो दूसरी तरफ कोरोना का तनाव। पिछले 13 दिन में ओमिक्रान के मामले नौ गुना बढ़े हैं। ऐसे में चुनाव वाले राज्यों में मतदाता जागरूकता, सुरक्षा व्यवस्था व लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना होगा।
गुरुवार को प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक दलों की मांग पर ही समय पर चुनाव हो रहे हैं। इसके लिए सभी राजनीतिक पार्टियों को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। हालांकि तीन दिन पहले ही बढ़ते कोरोना के मामलों के मद्देनजर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उत्तर प्रदेश चुनाव टालने और रैलियों पर तुरंत पाबंदी लगाने का आग्रह किया था।
दरअसल, हाईकोर्ट के जज शेखर यादव ने आग्रह करते हुए कहा था कि जान है तो जहान है। अगर रैलियों को नहीं रोका गया तो परिणाम दूसरी लहर से भी बदतर होंगे। वैसे कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के कारण चुनावों को कुछ समय के लिए टाला भी जा सकता था। परंतु चुनाव न होने की स्थिति में उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाना होगा। यदि ऐसा होता तो चुनाव की जो तैयारियां हो चुकी हैं, वह स्थगित हो जाएंगी। इसी के मद्देनजर आयोग ने चुनाव न टालने का फैसला किया है।
आयोग ने प्रचार और भीड़ प्रबंधन पर एहतियातन कई बड़े प्रबंध करने की घोषणा की है। प्रदेश भर में हर मतदान केंद्र पर तैनात किए जाने वाले कर्मचारी पूरी तरह से वैक्सीनेटेड होंगे। सभी को अपना मताधिकार का मौका मिले, इसके लिए तय किया गया है कि 80 साल की उम्र पार कर चुके लोग, दिव्यांगजन और कोरोना पॉजिटिव लोगों को मतदान केंद्र पर आने की जरूरत नहीं होगी। ये लोग घर से ही वोट कर सकेंगे। कुछ राजनीतिक दल ज्यादा रैलियों के खिलाफ हैं।
आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से रैलियों की संख्या को सीमित करने को भी कहा है। सो वर्चुअल रैलियों का सहारा लिया जा सकता है। चुनावों के संचालन के दौरान, आयोग के पास बहुत से अधिकार और शक्तियां होती हैं। इसलिए उम्मीद की जा सकती है कि स्वास्थ्य मंत्रालय व चुनाव आयोग ने जो कोविड प्रोटोकॉल निर्धारित किया है और उसका पालन कराने की पूरी व्यवस्था की जाएगी।
