विधानसभा चुनाव 2022: योगी सरकार ने चली चाल, अब विपक्ष गन्ना मूल्य को नहीं बना पाएगी हथियार
लखनऊ। आगामी विधानसभा चुनाव 2022 में उत्तर-प्रदेश की योगी सरकार ने विपक्षी दलों से गन्ना मूल्य भुगतान को चुनावी मुद्दा बनने का मौका न देने के लिए एड़ीचोटी का जोर लगा दिया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनाव अक्सर गन्ने के मुद्दे पर जीते या हारे जाते हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मायावती सरकार …
लखनऊ। आगामी विधानसभा चुनाव 2022 में उत्तर-प्रदेश की योगी सरकार ने विपक्षी दलों से गन्ना मूल्य भुगतान को चुनावी मुद्दा बनने का मौका न देने के लिए एड़ीचोटी का जोर लगा दिया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनाव अक्सर गन्ने के मुद्दे पर जीते या हारे जाते हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मायावती सरकार पर उत्तर प्रदेश चीनी निगम की मिलों को औने पौने दाम बेचे जाने के विवाद और उसकी सीबीआई जांच पर राजनीति ऐसी गरमायी कि बसपा को सत्ता से बाहर होना पड़ा।
इसी तरह 2017 में तत्कालीन सपा सरकार को अन्य मुद्दों के साथ ही बकाया गन्ना मूल्य का समय से भुगतान न करने पर हार का मुंह देखना पड़ा। 2017 के विधान सभा चुनाव में जाट समुदाय पूरी से तरह से भाजपा के साथ था, यही वजह थी कि पश्चिम के 14 जिलों की 71 विधान सभा सीटों में से भाजपा को 51 सीटों पर जीत मिली थी।
राज्य के गन्ना मंत्री सुरेश राणा दावे के साथ कहते हैं कि पिछले साढ़े चार साल में जितना गन्ना मूल्य भुगतान वर्तमान योगी सरकार ने किया है उतना पिछले दस साल की बसपा और सपा सरकार मिलकर भी नहीं कर सकीं। राणा के अनुसार योगी सरकार ने अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में 1.51 करोड़ रूपये का गन्ना मूल्य किसानों को अदा किया जिसमें सपा और बसपा सरकारों के कार्यकाल का बकाया गन्ना मूल् भी शामिल है। जबकि सपा सरकार ने अपने कार्यकाल में 95 हजार और बसपा सरकार ने 55 हजार करोड़ रूपये का गन्ना मूल्य भुगतान किसानों को किया था।
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जहां एक तरह योगी सरकार ने चालू पेराई सत्र के लिए गन्ना मूल्य में 25 रूपये प्रति कुंतल की बढ़ोत्तरी की अपने पूरे कार्यकाल में इस सरकार ने गन्ना मूल्य 35 रुपये प्रति कुंतल बढ़ाया। वहीं दूसरी तरफ अब तक पिछले पेराई सत्र 2020-21 के गन्ना मूल्य का 95 प्रतिशत भुगतान कर दिया है।
गन्ना विकास व चीनी उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी के अनुसार पिछले पेराई सत्र का कुल 33 हजार 500 करोड़ रूपये का गन्ना मूल्य बनता था जिसमें से अब महज 2500 करोड़ रूपये का गन्ना मूल्य भुगतान बकाया है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि इसी जनवरी माह में यह 2500 करोड़ का पिछला बकाया गन्ना मूल्य भी अदा कर दिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल्स संघ और उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम के प्रबंध निदेशक रमाकांत पाण्डेय के अनुसार राज्य की 24 सहकारी चीनी मिलों ने पिछले पेराई सत्र 2020-21 के 2765.04 करोड़ और चीनी निगम ने 406.40 करोड़ रूपये के गन्ना मूल्य का शतप्रतिशत भुगतान कर दिया है। विभाग के सूत्रों के अनुसार किसानों को इस गन्ना मूल्य भुगतान के लिए सहकारी चीनी मिल्स संघ को महंगी ब्याज दरों पर 400 करोड़ रूपये का कर्ज भी उठाना पड़ा।
