उकसावे की हरकत

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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चीन लगातार भारत को उकसा रहा है। चीन का दावा है कि उसकी सेना ने भारत से सटी गलवान घाटी में अपना झंडा फहराया है। हालांकि अभी सच्चाई का पता नहीं है। यह चीनी फितरत का कमाल भी हो सकता है। जिस हिस्से में चीनी सेना ने झंडा फहराया है, वो भारत के हिस्से वाली …

चीन लगातार भारत को उकसा रहा है। चीन का दावा है कि उसकी सेना ने भारत से सटी गलवान घाटी में अपना झंडा फहराया है। हालांकि अभी सच्चाई का पता नहीं है। यह चीनी फितरत का कमाल भी हो सकता है। जिस हिस्से में चीनी सेना ने झंडा फहराया है, वो भारत के हिस्से वाली गलवान घाटी है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। वहीं विपक्ष एक बार फिर केंद्र सरकार से सवाल पूछ रहा है। पिछले दिनों चीन ने अरुणाचल प्रदेश के 15 स्थानों के नाम बदल दिए थे।

नामकरण की घोषणा चीन में नए सीमा कानून लागू होने से पहले की गई थी। दो माह पहले चीन ने एक नया सीमा कानून बनाया है, जो राज्य और सेना को क्षेत्र की रक्षा करने तथा चीन के क्षेत्रीय दावों को कमज़ोर करने वाले ‘किसी भी कार्य का मुकाबला’ करने का प्रावधान करता है। नया भूमि सीमा कानून पूर्वी लद्दाख में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच जारी गतिरोध के बीच अपनाया गया। इसे सीमा विवाद के लिए चीन के दृष्टिकोण में व्यापक परिवर्तनों की पृष्ठभूमि के खिलाफ देखा जाना चाहिए।

सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दोहराया था कि अरुणाचल प्रदेश राज्य भारत का अभिन्न अंग है। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस कदम के जवाब में एक बयान में कहा कि ‘आविष्कृत नाम निर्दिष्ट करना’ जमीन पर किसी भी तथ्य और भारत के अभिन्न अंग के रूप में अरुणाचल की स्थिति को ‘बदल’ नहीं देगा। इससे पहले बीजिंग ने 2017 में, चीनी अधिकारियों ने अरुणाचल में छह स्थानों के लिए ‘आधिकारिक’ नाम जारी किए थे।

अबकी बार सूची लंबी है, इस बार न केवल आठ शहर शामिल हैं बल्कि चार पहाड़, दो नदियां और एक पहाड़ी दर्रा भी शामिल है। इस सूची में अरुणाचल के 25 में से 11 जिले शामिल हैं, जो पश्चिम में तवांग से लेकर उत्तर में दिबांग घाटी और पूर्व में अंजा तक फैले हुए हैं। स्थानों के विस्तार से पता चलता है कि पूरे राज्य में चीनी दावों को दोहराने के लिए स्थानों को चुना गया था। यदि यें खबरे सही हैं तो एक गंभीर मामला है और चीन के साथ हमें इस मुद्दे को पूरे जोर से उठाना चाहिए।

चीन के रुख के बारे कोई भरोसा नहीं किया जा सकता। वह भारत को परेशानी में डालने वाला कोई भी कदम उठाने से बज नहीं आने वाला। हालांकि चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देखते हुए अरुणाचल प्रदेश सहित सभी संवेदनशील सीमाई इलाकों में भारत ने मोर्चाबंदी करनी शुरू कर दी है। फिर भी सीमा संबंधी मुद्दों को चीन के साथ मजबूती से उठाना चाहिए।