केरल: उच्च न्यायालय ने छात्रा की खुदकुशी मामले में पति को जमानत देने से किया इनकार
कोच्चि। केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कानून की पढ़ाई करने वाली 21 वर्षीय छात्रा की आत्महत्या मामले में उसके पति को जमानत देने से इंकार कर दिया। छात्रा ने सुसाइड नोट में यह कदम उठाने के पीछे अपने पति, सास-ससुर और एक पुलिस अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया था। न्यायमूर्ति गोपीनाथ पी ने छात्रा के …
कोच्चि। केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कानून की पढ़ाई करने वाली 21 वर्षीय छात्रा की आत्महत्या मामले में उसके पति को जमानत देने से इंकार कर दिया। छात्रा ने सुसाइड नोट में यह कदम उठाने के पीछे अपने पति, सास-ससुर और एक पुलिस अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया था।
न्यायमूर्ति गोपीनाथ पी ने छात्रा के पति को जमानत देने से इंकार करते हुए कहा कि उस पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं। हालांकि, उच्च न्यायालय ने आरोपी के माता-पिता को यह कहते हुए जमानत दे दी कि उनके खिलाफ आरोप अस्पष्ट हैं और दहेज की मांग तक सीमित हैं। अतिरिक्त लोक अभियोजक पी नारायणन ने पीड़िता के पति और उसके सास-ससुर को किसी भी तरह की राहत दिए जाने का विरोध किया और कहा कि इनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं।
पीड़िता के पति और उसके सास-ससुर को पिछले साल 24 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था और उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304बी (दहेज हत्या), 498ए (दहेज प्रताड़ना), 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत मामला दर्ज किया गया था। कानून की पढ़ाई कर रही तृतीय वर्ष की छात्रा मोफिया परवीन ने अपने सुसाइड नोट में आरोप लगाया था कि वह पति और सास-ससुर के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा की शिकायत के संबंध में अपना बयान दर्ज कराने के लिए पिता के साथ थाने गई तो अलुवा ईस्ट पुलिस स्टेशन के तत्कालीन एसएचओ ने थाने में उसके साथ दुर्व्यवहार किया था।
