रुद्रपुर: आर्थिक तंगी ने एक चैंपियन से छीन लिया विश्व को साबित करने का मौका

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मनीष तिवारी, अमृत विचार, रुद्रपुर। आर्थिक तंगी ने एक चैंपियन से विश्व में खुद को साबित करने का मौका छीन लिया। सिलेक्शन होने के बावजूद खिलाड़ी जय प्रकाश नवंबर में अबू धाबी में हुई नौ दिन की प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सका। नेशनल में तीन बार गोल्ड पा चुका उत्तराखंड का यह उभरता खिलाड़ी …

मनीष तिवारी, अमृत विचार, रुद्रपुर। आर्थिक तंगी ने एक चैंपियन से विश्व में खुद को साबित करने का मौका छीन लिया। सिलेक्शन होने के बावजूद खिलाड़ी जय प्रकाश नवंबर में अबू धाबी में हुई नौ दिन की प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सका। नेशनल में तीन बार गोल्ड पा चुका उत्तराखंड का यह उभरता खिलाड़ी अपने खेल करियर पर पैसे का अभाव का ग्रहण हटाने के लिए जूझ रहा है।

प्रमाण पत्र के साथ खिलाड़ी जय प्रकाश।

ऊधम सिंह नगर के दिनेशपुर के गांव बुक्सौरा का रहने वाला 18 वर्षीय जयप्रकाश बैचलर ऑफ आर्ट का प्रथम वर्ष का छात्रहै। उसके अनुसार वर्ष 2017 की जनवरी से इस खेल में आने के बाद उसने दो महीने बाद मार्च में दिल्ली में हुई नेशनल चैंपियन शिप में यूपी के एक खिलाड़ी को हराकर गोल्ड मेडल प्राप्त किया था। वह उसके करियर का पहला गोल्ड था।

उसकी प्रतिभा को देख सभी दंग थे, लिहाजा आगे भी उसके अवसर के रास्ते खुलने शुरू हो गए। ताल कटोरा स्टेडियम में गोल्ड के बाद उसने दूसरा गोल्ड अंडर-16 की नेशनल प्रतियोगिता में वर्ष 2018 में प्राप्त किया। उसके बाद वर्ष 2019 की जूनियर सीनियर और कैडेट की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता तमिलनाडु में अपनी प्रतिभा को साबित करते हुए तीसरा गोल्ड प्राप्त किया। उसकी प्रतिभा ने जुजित्सु खेल से जुड़े खिलाड़ियों से लेकर कोच और सिलेक्शन टीम पर ऐसी छाप छोड़ी कि नेशनल के बाद उसे एशियन और फिर विश्व चैंपियनशिप के लिए दावेदार माना जाने लगा।

जय प्रकाश का नाम उत्तराखंड के उन छह खिलाड़ियों में शामिल किया गया, जिन्हें 12 से 16 सितंबर तक होने वाले अबू धाबी में होने वाले एशियन चैंपियनशिप में मौका मिला। लेकिन प्रैक्टिस के दौरान पैर में लगी चोट ने उसका यह अवसर छीन लिया। इस घटना के बाद भी वह हारा नहीं और ठीक होने के बाद दोबारा उसने प्रयास किया और उत्तराखंड के ही एक अन्य खिलाड़ी के साथ दूसरे नंबर पर उसका सिलेक्शन तीन से 11 नवंबर तक होने वाली विश्व स्तरीय जुजित्सु चैंपियनशिप में भी हो गया। लेकिन अबू धाबी तक जाने के खर्चे के लिए उसका परिवार तैयार नहीं था और आर्थिक मजबूरी ने उसका विश्व चैंपियन बनने का अवसर उससे छीन लिया। उसके खेल करियर पर आर्थिक तंगी ग्रहण न बने, इसलिए वह मदद के लिए राजनीतिक नेताओं से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक के दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर है।

तंगी के बावजूद बेटे का हौसला बढ़ाते हैं पिता
किसान पिता प्रेम चंद्र को आर्थिक समस्याओं ने हमेशा तंग किया। लेकिन इन परिस्थितियों के बीच उन्होंने कभी अपने बेटे का हौसला नहीं गिराया। उसकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने की हर संभव कोशिश और हमेशा उसका मनोबल बढ़ाया। पिता की आर्थिक स्थिति को देखते हुए इस खिलाड़ी ने सिडकुल में नौकरी भी ढूंढ ली। लेकिन वहां से जो उसे वेतन के रूप में मिलता है, उसके मार्क्स लाइट का विश्व चैंपियन बनाने में नाकाफी है। मां मीना देवी हर रोज बेटे के उज्ज्वल भविष्य की कामना करतीं हैं। बेटे को एक बड़े खिलाड़ी के रूप में देखने का उनका सपना है।

शिव अरोरा, जिलाध्यक्ष, भाजपा

जयप्रकाश अच्छा खिलाड़ी है। नवंबर में हुई विश्व चैंपियन शिप में भारत की टीम प्रतिभाग नहीं कर सकी थी। बेहतर प्रदर्शन और खिलाड़ियों के जोश के साथ हम विश्व में साबित करने का प्रयास करेंगे।
– विनय कुमार जोशी, महासचिव, जुजित्सु एसोसएशन ऑफ इंडिया

विनय कुमार जोशी, महासचिव, जुजित्सु एसोसएशन ऑफ इंडिया

जयप्रकाश की प्रतिभा को देश जानता है। वह विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन कर सकता है। हमारी कोशिश रहेगी कि उसके खेल करियर पर कोई अड़चन न आए।- शिव अरोरा, जिलाध्यक्ष, भाजपा

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