नवाचारों को प्रोत्साहन
बीते दो वर्षों में अर्थव्यवस्था संकट में रही है। दुनिया अब भी कोरोना महामारी की लगातार आ रही लहरों का सामना कर रही है। महामारी के कारण अर्थ व्यवस्था में उथलपुथल जारी रहेगी। देश में महामारी से निपटने की कोशिश में घाटा बढ़ा है और सरकारी कर्ज में तेजी से इजाफा हुआ। केंद्र और राज्यों …
बीते दो वर्षों में अर्थव्यवस्था संकट में रही है। दुनिया अब भी कोरोना महामारी की लगातार आ रही लहरों का सामना कर रही है। महामारी के कारण अर्थ व्यवस्था में उथलपुथल जारी रहेगी। देश में महामारी से निपटने की कोशिश में घाटा बढ़ा है और सरकारी कर्ज में तेजी से इजाफा हुआ। केंद्र और राज्यों का सरकारी कर्ज जीडीपी के 90 फीसदी के करीब है। महामारी के पहले यह 70 फीसदी था जबकि इसका वांछित स्तर 60 फीसदी है। कई राज्य सरकारों ने सार्वजनिक आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिसका असर उत्पादन पर पड़ेगा। ऐसे में हमें स्टार्टअप को और अधिक प्रभावी बनाने के बारे में सोचना चाहिए।
सरकार ने स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। सोमवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि ऐसे वक्त में जब दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है, स्टार्टअप दुनियाभर में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को सामाजिक और लोकतांत्रिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। चिंता की बात है कि भारत में आर्थिक असमानता के कारण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में भी काफी विषमता है।
हकीकत भी यही है कि कोरोना काल में बहुत से लोग नौकरी जाने से सड़क पर आ गए। कई ऐसे लोग थे, जिन्होंने हौसला नहीं छोड़ा और कोरोना संक्रमण के बावजूद नौकरी चले जाने पर स्वरोजगार शुरू कर दूसरों को भी रोजगार मुहैया कराया। योजना के पहले वर्ष 2016-2017 में कुल 743 स्टार्टअप्स को मान्यता मिली थी। जबकि वर्ष 2020-2021 में अकेले 16,000 से अधिक स्टार्टअप्स को सरकार ने सूचीबद्ध किया, जो भारत के बेहतर और मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम को दर्शाता है। स्टार्टअप इंडिया स्कीम के साथ लिस्टेड स्टार्टअप का विस्तार अब 623 जिलों तक हो गया है।
इस समय देश के हर राज्य में कम से कम एक स्टार्टअप है। देश के 30 से अधिक (राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर) ने स्टार्टअप्स की इस सीरीज को समर्थन देने के लिए स्पेशल स्टार्टअप पॉलिसी की भी घोषणा की है। सबसे ज्यादा फूड प्रोसेसिंग, प्रोडेक्ट डेवलपमेंट, एप्लीकेशन डेवलपमेंट, आईटी कंसल्टेंसी और कॉमर्शियल सर्विसेज के क्षेत्र में स्टार्टअप रजिस्टर्ड हुए हैं। तीन वर्ष के दौरान स्टार्टअप ने छह लाख से अधिक नौकरियां पैदा की हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही हैं। इस लिहाज से स्टार्टअप का बेहतर प्रदर्शन भारतीय अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार के लिए जरूरी है। साथ ही स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी स्टार्टअप इंडिया पर जोर दिया जाना चाहिए। इसका प्रभाव नवाचारों के प्रोत्साहन के साथ दिखाई देगा।
