मुरादाबाद : तीन साल में सिर्फ 10 बच्चों को अपनों से मिला पाई चाइल्ड लाइन

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Edited By Amrit Vichar
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जूही/अमृत विचार। दुनिया की भीड़ में अपनों से बिछड़ चुके बच्चों को उनके घर तक पहुंचाने में चाइल्ड लाइन असफल होती नजर आ रही है। परिजनों तक पहुंचाने के नाम पर इन बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश कर शेल्टर होम भेज कर औपचारिकता निभा दी जाती है। इसके बाद न तो इन …

जूही/अमृत विचार। दुनिया की भीड़ में अपनों से बिछड़ चुके बच्चों को उनके घर तक पहुंचाने में चाइल्ड लाइन असफल होती नजर आ रही है। परिजनों तक पहुंचाने के नाम पर इन बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश कर शेल्टर होम भेज कर औपचारिकता निभा दी जाती है। इसके बाद न तो इन बच्चों की सुधि चाइल्ड लाइन के पदाधिकारी लेते हैं, न ही संबंधित थाना क्षेत्र की पुलिस। तीन सालों में चाइल्ड लाइन की टीम केवल 10 बच्चों को ही परिजनों से मिला पाई है, जबकि शिकायतों की बात करें तो हर साल 25-30 बच्चों के लापता होने के मामले यहां पहुंचते हैं।

चाइल्डलाइन हेल्पलाइन की रिपोर्ट के अनुसार मार्च से नवंबर के बीच ‘चाइल्डलाइन 1098’ पर कुल 1000 कॉल्स आईं। इनमें 500 कॉल्स बच्चों के उत्पीड़न और हिंसा से जुड़ी थीं। कॉल करने वालों ने बच्चों को हिंसा और उत्पीड़न से सुरक्षा दिलाने की गुहार लगाई। अब महीने में 20 से 30 शिकायतें आ रही हैं, जिनमें मेडिकल सहायता, बाल विवाह, घर से भागे हुए बच्चों की शिकायतें शामिल हैं।

जागरूक हो रहे लोग
चाइल्ड लाइन प्रभारी श्रद्धा शर्मा ने बताया कि चाइल्ड लाइन हेल्पलाइन पर बढ़ती शिकायतें इस बात की गवाह हैं कि हेल्पलाइन के प्रति लोग जागरूक हो रहे है। पहले की तरह शोषण को सहन नहीं करते। बताया कि हेल्पलाइन पर जो भी कॉल आती है, उन पर तुरंत एक्शन लिया जाता है। इसके साथ ही गुमशुदा बच्चों के परिजनों को भी टीम द्वारा खोजने की कवायद जारी है।

जनपद में नहीं है बालिका गृह
मुरादाबाद जनपद में बालिका गृह न होने से लड़कियों को रखने की समस्या बनी हुई है। चाइल्ड लाइन के प्रभारी श्रद्धा शर्मा ने बताया कि पहले बरामदगी की गई बालिकाओं को नारी निकेतन में रखा जाता था। लेकिन, सात महीनों से नारी निकेतन के संचालक कोर्ट के नए आदेशों का हवाला देकर बालिकाओं को रखने से इनकार कर रहे हैं। इसके बाद अब चाइल्ड लाइन द्वारा उन बालिकाओं की देखरेख की जा रही है। वर्तमान में एक बालिका यहां निवास कर रही है।

बच्चों की होती है काउंसिलिंग
प्रभारी बताती हैं कि बच्चों की बरामदगी करने के बाद उनकी काउंसिलिंग की जाती है। जो बच्चे परिजनों के बारे में जानकारी दे देते हैं, पुलिस की मदद से उनके परिजनों को खोजा जाता है। उन्होंने बताया कि तीन सालों में टीम द्वारा 10 बच्चों को परिजनों से मिलाया गया है।

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