रायबरेली के सियासी हलके में बढ़ी सरगर्मी, प्रसाद ने योगी मंत्रिमंडल से दिया इस्तीफा

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रायबरेली। प्रदेश सरकार के श्रम, सेवायोजन एवं समन्वय मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया है। इसकी जानकारी ट्वीट के जरिए दी गई है। हालांकि अभी स्वामी प्रसाद मौर्या ने भाजपा छोड़ने का एलान नहीं किया है। लेकिन जिस तरह उन्होंने ट्वीट किया है, उससे साफ है कि भाजपा को चुनाव में …

रायबरेली। प्रदेश सरकार के श्रम, सेवायोजन एवं समन्वय मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया है। इसकी जानकारी ट्वीट के जरिए दी गई है। हालांकि अभी स्वामी प्रसाद मौर्या ने भाजपा छोड़ने का एलान नहीं किया है। लेकिन जिस तरह उन्होंने ट्वीट किया है, उससे साफ है कि भाजपा को चुनाव में झटका देने की तैयारी है। बसपा के कद्दावर नेता में शुमार रखने वाले पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या ने वर्ष 2017 में भाजपा का कमल थाम लिया था। यह परिवर्तन राजनीति के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण था।

बसपा के लिए उस दौरान बहुत बड़ा झटका लगा था। स्वामी प्रसाद मौर्या को दलित, पिछड़ों का बसपा में बड़ा चेहरा माना जाता था। उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि रायबरेली से ही जुड़ी रही है। 1996 में वह बसपा से डलमऊ विधानसभा के विधायक बने थे। हालांकि उसके बाद वह ऊंचाहार से 2012 में चुनाव लड़े, लेकिन जीत नहीं सके। इसके बाद भी बसपा में उनका कद कम नहीं हुआ। भाजपा में आने के बाद 2017 के चुनाव में उन्होंने अपने बेटे उत्कर्ष मौर्या को चुनाव में भाजपा की टिकट समय उतारा लेकिन उत्कर्ष को सपा के मनोज पांडेय ने कांटे की टक्कर में हराया। इसके बाद भी स्वामी प्रसाद को भाजपा में कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला।

31 दिसंबर को रायबरेली के आईटीआई मैदान में मुख्यमंत्री की जनसभा में स्वामी प्रसाद मौर्या ने भाजपा सरकार की तारीफों के पुल बांधे थे। लेकिन उसके बाद 10 दिन के भीतर स्वामी प्रसाद के यूटर्न से सियासी हलके में सरगर्मी बढ़ गई है।

पढ़ें: UP: स्वामी प्रसाद मौर्य ने कैबिनेट मंत्री पद से दिया इस्तीफा, सपा में हुए शामिल

स्वामी प्रसाद ने ट्वीट लिखा है कि दलितों, पिछड़ों, किसानों, बेराजगारों, छोटे, लघु एवं मध्यम श्रेणी की घोर उपेक्षात्मक रवैये के कारण वह प्रदेश मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे रहे हैं। स्वामी प्रसाद के इस कदम से ऊंचाहार में खाली हलचल है तो साथ ही प्रदेश की राजनीति में भी नया घटनाक्रम सामने आने को तैयार हैं। स्वामी प्रसाद मौर्या भाजपा को छोड़ते हैं तो रायबरेली के सियासी मैदान में भाजपा को झटका मिलना तय है।

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