चिंता की बात
कोरोना संक्रमण के आंकड़े बता रहे हैं कि स्थिति दिन-प्रतिदिन चिंताजनक हो रही है। देश में पिछले 24 घंटे के दौरान संक्रमण के एक लाख 94 हजार 720 नए मामले सामने आए हैं। जिससे कुल सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर साढ़े नौ लाख तक पहंच गई है। देश में सक्रिय मामलों की दर 2.65 फीसदी …
कोरोना संक्रमण के आंकड़े बता रहे हैं कि स्थिति दिन-प्रतिदिन चिंताजनक हो रही है। देश में पिछले 24 घंटे के दौरान संक्रमण के एक लाख 94 हजार 720 नए मामले सामने आए हैं। जिससे कुल सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर साढ़े नौ लाख तक पहंच गई है। देश में सक्रिय मामलों की दर 2.65 फीसदी और रिकवरी दर 96.01 फीसदी है जबकि मृत्यु दर 1.34 फीसदी है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगामी त्यौहारों के दौरान लोगों से कोरोना महामारी के प्रति सावधान रहने का आह्वान किया।
केंद्र ने राज्यों से कम से कम 48 घंटे के लिए मेडिकल ऑक्सीजन का पर्याप्त अतिरिक्त भंडार सुनिश्चित करने और ऑक्सीजन नियंत्रण कक्षों को फिर से मजबूत करने का आग्रह किया। दूसरी तरफ कोविड के नए स्वरुप ओमिक्रान से 27 राज्यों में अब तक 4,868 व्यक्ति संक्रमित पाए गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक ओमिक्रान प्रसार के लिहाज से डेल्टा से तेजी से आगे निकल रहा है लेकिन अन्य स्वरूपों की तुलना में इससे बीमारी की गंभीरता कम है। यह पहली या दूसरी लहर से बहुत अलग है, जहां मामलों में धीरे-धीरे उछाल आया था। अब नए स्वरूप के मामलों में भी तेजी से वृद्धि के हो रही है।
इस कारण यह डर है कि आने वाले दिनों में स्थिति ज्यादा बिगड़ सकती है। फिर भी दूसरी लहर के मुकाबले मृत्युदर कम होने से उम्मीद जगी है कि देश इस चुनौती का सफलतापूर्वक मुकाबला कर सकेगा। चिकित्सा वैज्ञानिक भी मान रहे हैं कि जिस तेजी से इस नए वायरस का संक्रमण बढ़ा है, उसी तेजी से इसमें गिरावट आएगी।
विभिन्न राज्य सरकारों ने संक्रमण को देखते हुए अपने स्तर पर बचाव के उपाय व पाबंदियां लगाई हैं, लेकिन फिलहाल पूर्ण लॉकडाउन की संभावना नहीं है। क्योंकि पहली लहर में पूर्ण लॉकडाउन से संक्रमण तो रुका लेकिन आर्थिक व व्यापारिक गतिविधियों पर बुरा प्रभाव पड़ा। फिलहाल इस बात की भी चिंता की जानी चाहिए कि घोषणाओं से ज्यादा योजनाओं का क्रियान्वयन कैसे हो। केंद्र व राज्यों को देखना होगा कि कोरोना संक्रमण से लड़ाई के उपाय महज कागजों तक ही सीमित न रह जाएं। प्रशासन का दायित्व बनता है कि सरकारी व निजी अस्पतालों में जरूरी दवाओं, बेड व ऑक्सीजन आदि की समुचित व्यवस्था हो। फोकस टेस्टिंग के दायरे को बढ़ाते हुए स्क्रीनिंग, सर्विलांस, जांच को तेजी से बढ़ाया जाना चाहिए।
