मुद्दों पर बात
चुनाव आया है, तो दलबदल और पालाबदल भी स्वाभाविक है, लेकिन उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा में जो भगदड़ देखने है, वो उसके लिए आगामी चुनाव में चिंता का कारण बन सकती है। जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें उत्तर प्रदेश सबसे महत्वपूर्ण राज्य है। चुनाव को 2024 के आम …
चुनाव आया है, तो दलबदल और पालाबदल भी स्वाभाविक है, लेकिन उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा में जो भगदड़ देखने है, वो उसके लिए आगामी चुनाव में चिंता का कारण बन सकती है। जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें उत्तर प्रदेश सबसे महत्वपूर्ण राज्य है। चुनाव को 2024 के आम चुनाव का पूर्वाभ्यास माना जा रहा है। प्रदेश को लेकर अभी तक जितने भी चुनावी विश्लेषण, आकलन और सर्वेक्षण सामने आए हैं, उनमें भाजपा की बढ़त दिखाई गई है।
अलबत्ता समाजवादी पार्टी उसे तगड़ी चुनौती पेश कर रही है। पिछले तीन दिनों में जिन मंत्रियों और विधायकों ने पार्टी से इस्तीफ़ा दिया है, लगभग सभी ने योगी सरकार की कार्यशौली पर सवाल उठाए हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने तो दावा किया है कि रोजाना राज्य सरकार के एक-दो मंत्री इस्तीफा देंगे और 20 जनवरी तक यह आकंड़ा बढ़ता रहेगा। बहरहाल ये बयान दबाव की राजनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन दलबदल कोई असामान्य घटना नहीं है। सभी इस्तीफों में पार्टी पर दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को नजर अंदाज करने का आरोप लगाया गया है। भाजपा को 2017 के विधानसभा चुनाव में अभूतपूर्व सफलता मिली थी और वह 300 से अधिक सीटें जीतने में कामयाब रही थी।
2017 के चुनाव से पहले भाजपा बड़ी संख्या में बसपा और सपा के पिछड़ा वर्ग के नेताओं को जोड़ने में कामयाब रही थी। पार्टी को इसका फायदा भी हुआ था। इसका श्रेय काफी हद तक स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान और धर्म सिंह सैनी जैसे नेताओं को दिया गया और योगी मंत्रिमंडल में इन्हें जगह भी मिली। यकीनन इस पाला बदल से भाजपा के चुनावी समीकरणों को झटका लगा होगा। पार्टी के बड़े नेता नुकसान की भरपाई में जुटे हैं, लिहाजा कई नाराज़ विधायकों को मनाने की कवायद जारी है। फिर भी इस दल बदल के कारण भाजपा का सफाया हो जाएगा, यह जल्दबाजी का निर्णय साबित हो सकता है।
ऐसा नहीं है कि सिर्फ भाजपा के विधायक ही पाला बदल रहे हैं, सपा के विधायक और मुलायम सिंह के परिवार के ही ओम यादव ने भी समाजवादी पार्टी छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है। चुनाव के समय सभी दलों से जुड़े लोग सुरक्षित राजनीतिक जमीन की तलाश में रहते हैं तभी तो कांग्रेस की महासचिव प्रियंका ने कहा कि यह ऐसी चीज है जिससे किसी भी पार्टी को घबराना नहीं चाहिए। चुनाव का पहला चरण करीब एक महीने बाद होना है। आने वाले दो सप्ताह में जिस तरह के आरोप-प्रत्यारोप लगेंगे वे ज्यादा परिणाम को प्रभावित करेंगे। अफसोस है कि ऐसे में बेरोज़गारी, महंगाई, अपराध आदि जैसे चुनाव के मुदों पर बात नहीं हो पा रही है।
