सुस्त अर्थव्यवस्था

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाले औद्योगिक उत्पादन की सुस्ती टूट नहीं पा रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी विभाग की ताजा रिपोर्ट में औद्योगिक क्षेत्र की गति धीमी दर्ज हुई है। अब तीसरी लहर के बीच महंगाई के आंकड़े भी परेशानी बढ़ाने वाले हैं। यानि एक ओर लोगों की आय घट रही है और दूसरी ओर …

अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाले औद्योगिक उत्पादन की सुस्ती टूट नहीं पा रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी विभाग की ताजा रिपोर्ट में औद्योगिक क्षेत्र की गति धीमी दर्ज हुई है। अब तीसरी लहर के बीच महंगाई के आंकड़े भी परेशानी बढ़ाने वाले हैं। यानि एक ओर लोगों की आय घट रही है और दूसरी ओर महंगाई बढ़ रही है। जो चिंता की बात है। औद्योगिक उत्पादन में कमी और महंगाई में लगातार बढ़ोतरी ऐसे बिंदु हैं, जो आर्थिक विकास दर में वृद्धि में सबसे बड़ी रुकावट साबित हो रहे हैं। रिजर्व बैंक का भी अनुमान है कि अभी महंगाई दर बढ़ेगी।

करीब दो साल से जारी कोरोना महामारी की दूसरी लहर में करीब-करीब हर व्यक्ति की आय के स्रोत कम हुए। करोड़ों लोगों की नौकरियां गई और लाखों लोगों के वेतन में कटौती हुई। उम्मीद की जा रही थी कि महामारी की दूसरी लहर से उबरने के बाद अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटने से स्थितियां सामान्य होंगी। लेकिन कोरोना के नए स्वरुप ओमिक्रान की वजह से उम्मीदों पर पानी फिर गया। देश में ओमिक्रान के 5723 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। जबकि एक दिन में पिछले 239 दिनों में सबसे अधिक 2,64,202 नए मामले आए हैं। गुरुवार को सांख्यिकी विभाग द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति दर दिसंबर में पांच माह के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

खुदरा महंगाई साढ़े पांच प्रतिशत से अधिक हो गई है। औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि गिरकर नौ माह में सबसे कम रही है। अब संक्रमण रोकने के लिए कई राज्यों में लगे प्रतिबंधों से फिर आर्थिकी को झटका लगेगा। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने को महंगाई बढ़ने का प्रमुख कारण माना जाता है। हालांकि कुछ समय से इनके दाम स्थिर हैं। अर्थव्यवस्था के गति न पकड़ पाने की प्रमुख वजह बाजार की मांग घटना है। बाजार में वस्तुओं की मांग तभी बढ़ेगी, जब लोगों की क्रय शक्ति बढ़े और क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए रोजनगार के नए अवसर पैदा करने होंगे।

जिन लोगों के रोजगार कोरोनाकाल में छिने हैं, उन्हें वापस दिलाने का प्रयास करना होगा। जब इस दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए जाते अर्थव्यवस्था पुरानी गति नहीं पकड़ सकती। साथ ही जरुरी वस्तुओं की कीमतें नियंत्रित और व्यावहारिक बनाने के लिए कारगर उपाय करने होंगे। हालांकि, कोरोना संकट के बीच महंगाई एक वैश्विक समस्या है लेकिन महंगाई को लेकर सरकार को संवेदनशील होना चाहिए।