बाराबंकी: यूपी चुनाव-2022, किसी भी दल के लिए वफादार नहीं रही ‘कुर्सी’,

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बाराबंकी। कहते हैं कि कुर्सी कभी किसी एक की नहीं होती। जिले की कुर्सी विधानसभा क्षेत्र का भी यही हाल है। इस विधानसभा क्षेत्र ने भी हर बार अपने प्रतिनिधि बदल दिए। यह जरूर है कि इस विधानसभा क्षेत्र ने जिस दल को मौका दिया प्रदेश में उसकी ही सरकार बनी। फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र का …

बाराबंकी। कहते हैं कि कुर्सी कभी किसी एक की नहीं होती। जिले की कुर्सी विधानसभा क्षेत्र का भी यही हाल है। इस विधानसभा क्षेत्र ने भी हर बार अपने प्रतिनिधि बदल दिए। यह जरूर है कि इस विधानसभा क्षेत्र ने जिस दल को मौका दिया प्रदेश में उसकी ही सरकार बनी।

फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा थी कुर्सी सीट

यहां सत्तारूढ़ दल के विधायक को अपने ही दल के दावेदारों से टिकट के लिए ही कड़ी चुनौती मिल रही है। विपक्षी खेमे में भी दावेदारों की कोई कमी नहीं है। 2012 में परिसीमन के बाद इस विधानसभा क्षेत्र का गठन किया गया था। पहले इसका अधिकांश हिस्सा फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र कहलाता था।

यह विधानसभा क्षेत्र बाराबंकी जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कुर्सी बाराबंकी का तो सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है ही इससे लखनऊ के करीब होने के कारण लखनऊ का भी औद्योगिक क्षेत्र माना जाता है। लिहाजा इस क्षेत्र के चुनाव पर बाराबंकी के अलावा सीतापुर और लखनऊ की नजर भी लगी रहती है।

यहां की जमीन न सिर्फ उपजाऊ है बल्कि राजधानी लखनऊ से सटा होने के कारण बेशकीमती भी है। लिहाजा रियल स्टेट लाबी भी इस क्षेत्र पर नजरें गड़ाए रहती है। पिछले विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा के उम्मीदवार साकेन्द्र प्रताप वर्मा ने 28 679 मतों से समाजवादी पार्टी के फरीद महफूज किदवई को हराकर यह सीट जीती थी।

2017 में बीजेपी ने हासिल की थी इस सीट पर जीत

फरीद महफूज किदवई ने इस विधानसभा क्षेत्र के गठन के बाद 2012 में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी। वे अखिलेश सरकार में मंत्री भी रहे। लेकिन जब दोबारा चुनाव हुए तो फरीद महफूज किदवई 79724 मत पाकर दूसरे स्थान पर सिमट गई। भाजपा उम्मीदवार को 108403 मत प्राप्त हुए थे।

फिलहाल कुर्सी विधानसभा क्षेत्र में 393688 मतदाता है। जिनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 210069 है। महिला मतदाताओं की संख्या 183609 है। 10 ट्रांसजेंडर भी यहां की वोटर लिस्ट में शामिल है।

जीत हार के समीकरण

इस विधानसभा क्षेत्र में 31917 मतदाता पहली बार मतदान करने जा रहे हैं। यह मतदाता निर्णायक भूमिका अदा कर सकते हैं। 80 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं की संख्या भी यहां 39675 है जो पहली बार पोस्टल बैलेट के जरिए मतदान करेंगे।इस विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक पिछड़ी जातियों के वोट है। लेकिन पिछड़ा वर्ग यादव कुर्मी और अन्य में बटा हुआ है। इसके बाद क्रमश: दलित और स्वर्ण मतदाताओं का नंबर आता है।

वर्तमान स्थिति

इस विधानसभा सीट से किसी भी राजनीतिक दल ने अब तक अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। लेकिन भाजपा से मौजूदा विधायक साकेंद्र प्रताप वर्मा का लड़ना तय माना जा रहा है। हालांकि उन्हें पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुरेंद्र प्रताप वर्मा से कड़ी चुनौती मिल रही है।क्षेत्र से विभिन्न राजनीतिक दलों से 30 से 32 उम्मीदवार टिकट की आस में लगे हुए हैं। समाजवादी पार्टी से पूर्व विधायक फरीद महफूज किदवई का लड़ना भी लगभग तय है। उनके दल में भी दावेदारों की खासी संख्या है। कांग्रेस और बसपा के भी उम्मीदवार अभी तय नहीं है।

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