लखनऊ: विवेकानंद सिर्फ नाम का चैरिटेबल अस्पताल, इतने रुपए दिए तब मिला शव…

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लखनऊ। राजधानी में जहां एक तरफ लोग कोरोना के कहर से परेशान हैं वहीं दूसरी तरफ इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों की मनमानी चरम पर है। विवेकानंद पॉलीक्लीनिक से ताजा मामला मंगलवार को सामने आया है जहां डॉक्टरों की लापरवाही ने मरीज की जान ले ली। परिजनों का आरोप है कि महज 53 हजार …

लखनऊ। राजधानी में जहां एक तरफ लोग कोरोना के कहर से परेशान हैं वहीं दूसरी तरफ इलाज के नाम पर निजी अस्पतालों की मनमानी चरम पर है। विवेकानंद पॉलीक्लीनिक से ताजा मामला मंगलवार को सामने आया है जहां डॉक्टरों की लापरवाही ने मरीज की जान ले ली। परिजनों का आरोप है कि महज 53 हजार रुपयों के लिए मरीज का शव देने से इंकार कर दिया गया। परिजनों ने जैसे-तैसे पैसों का इंतजाम कर शव को अस्पताल से बाहर निकाला। मृतक के परिजनों ने इस मामले में सीएमओ तक से गुहार लगाई थी।

पीडीआई में मरीज भर्ती नहीं हुआ तब लाए विवेकानंद अस्पलात

दरअसल, बीते 31 दिसम्बर को बरेली निवासी सरस्वती अग्रवाल (65) को सांस लेने में दिक्कत होने पर परिजनों ने स्थानीय अस्पताल खुशलोक अस्पताल में भर्ती कराया। वहां पर मरीज की हालत बिगडऩे पर चिकित्सकों ने राजधानी के एसजीपीजीआई रेफर कर दिया।

पीजीआई में परिजनों ने मरीज को भर्ती कराने के लिए हाथ जोड़े, मिन्नतें की लेकिन वहां किसी का दिल नहीं पसीजा, थकहार कर परिजन मरीज को लेकर विवेकानंद पॉलिक्लीनिक पहुंचे,जहां पर इमरजेंसी में मरीज को भर्ती कर चिकित्सकों ने इलाज देना शुरू कर दिया,लेकिन दिन बीतते ही चिकित्सकों ने मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत बतायी,जिसके बाद मरीज को वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया गया। परिजन सुरेश गुप्ता का आरोप है कि करीब चार दिन चले

इलाज के दौरान खर्च हो गए तीन लाख रुपए

इलाज के दौरान तीन लाख से ऊपर खर्च हो गये, उन्होंने बताया कि इस दौरान धीरे-धीरे हमारे पास से पैसे भी खत्म होते जा रहे थे, तब हमने मरीज को किसी सरकारी अस्पताल में विवेकानन्द अस्पताल से रेफर कराने का मन बनाया, लेकिन जब यहां पर दूसरी जगह ले जाने के लिए कोरोना वायरस की जांच करायी तो वह मरीज कोरोना संक्रमित हो गयी। जिसके बाद विवेकानन्द अस्पताल में ही मरीज को रखना मजबूरी हो गयी,यहां पर ही मरीज का इलाज चलता रहा।

सुरेश गुप्ता ने बताया कि बीते सोमवार की रात पैसे समाप्त हो गये,यह बात अस्पताल प्रबंधन को बतायी भी गयी और कहा गया कि सुबह तक पैसों का इंतजाम हो जायेगा। लेकिन उसके बाद भी मरीज को वेंटिलेटर से हटा कर सामान्य वार्ड में भर्ती कर दिया गया, मंगलवार तड़के मरीज की मौत हो गयी।

उसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने 53 हजार रूपये जमा करने को कहा। सुरेश गुप्ता के मुताबिक वह पैसे का इंतजाम करने बरेली चले गये थे,वहां मौजूदा समय में परिवार के पास पैसे कम थे,जिसके चलते अस्पताल प्रबंधन ने शव नहीं दिया। मंगलवार को जब पैसे जमा किये गये, उसके बाद शव मिल सका।

इलाज जारी रखने के लिए एसीएमओ से लगाई गुहार

सुरेश गुप्ता ने बताया कि सोमवार को पैसे की कमी होने पर मरीज का इलाज न रुके इसके लिए स्वास्थ्य महकमें से गुजारिश की गयी थी, जिसके चलते एसीएमओ ने मरीज का इलाज जारी रखने के लिए विवेकानन्द अस्पताल प्रबंधन को फोन भी किया था,उसके बाद भी मरीज को वेंटीलेटर से हटा दिया गया।

तीन दिन बिना पैसों के इलाज करने का दावा

अस्पताल प्रबंधन से जुड़े हरिगोविन्द वर्मा ने बताया कि जिस मरीज की रात में मौत हुयी थी, वह कोविड पॉजिटिव थीं,रात होने की वजह से शव को परिजन नहीं ले गये थे। उन्होंने बताया कि हमारे अस्पताल ने तीन दिन तक बिना पैसे के इलाज किया,सिर्फ परिजनों से दवाइयों के पैसे लिये जा रहे थे। सुबह बीस हजार रूपये लेकर शव को छोड़ दिया गया।

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