मुरादाबाद : टिकट से वंचित असंतुष्ट बिगाड़ सकते हैं दलीय प्रत्याशियों का खेल
विनोद श्रीवास्तव/अमृत विचार। विधानसभा चुनाव में टिकट पाने की ख्वाहिश पाले ऐसे उम्मीदवार जिन्हें पार्टियों ने टिकट से मना कर दिया है अब दलीय प्रत्याशियों का खेल बिगाड़ सकते हैं। ऐसे असंतुष्ट भाजपा, कांग्रेस, बसपा या अन्य दलों में भी हैं। जिन सीटों से दलों ने टिकट की घोषणा नहीं की है वहां भी इसको …
विनोद श्रीवास्तव/अमृत विचार। विधानसभा चुनाव में टिकट पाने की ख्वाहिश पाले ऐसे उम्मीदवार जिन्हें पार्टियों ने टिकट से मना कर दिया है अब दलीय प्रत्याशियों का खेल बिगाड़ सकते हैं। ऐसे असंतुष्ट भाजपा, कांग्रेस, बसपा या अन्य दलों में भी हैं। जिन सीटों से दलों ने टिकट की घोषणा नहीं की है वहां भी इसको लेकर डर बना है क्योंकि हर सीट पर कई दावेदार टिकट की टकटकी लगाए हैं।
मुरादाबाद जिले में कांग्रेस ने दो सीटों मुरादाबाद नगर और ग्रामीण सीट से अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दी है। जिन्हें टिकट मिला उनके समर्थकों ने ढोल नगाड़े बजाकर खुशी जाहिर की, जिन्हें नहीं मिला वह भीतरखाने तानाबाना बुन रहे हैं। मुरादाबाद ग्रामीण से दावेदारी ठोंकने वाले कांग्रेस सेवा दल के एक प्रांतीय पदाधिकारी टिकट की घोषणा होने के दिन 13 जनवरी को अपना नाम सूची में न देख आहत हो गए। उन्होंने बाकायदा अपने ह्वाट्सअप स्टेट्स पर 14 जनवरी को प्रेस कांफ्रेंस करने का ऐलान कर दल के बड़े पदाधिकारियों की धड़कन बढ़ा दी थी। आनन फानन में उनसे वरिष्ठों ने संपर्क साधकर फिलहाल के लिए तो रोक लिया, लेकिन उनके अगले कदम पर निगाहें लगी हैं। इस सीट पर टिकट पाने वाले मोहम्मद नदीम अंसारी सहित सात दावेदार थे।
शहर सीट पर भी एक पूर्व जिलाध्यक्ष समेत 11 दावेदार थे, इसमें से नगर निगम महापौर का चुनाव लड़ चुके रिजवान कुरैशी को टिकट मिला। ऐसे में खुद को टिकट का पक्का दावेदार मानने वाले कई दिग्गजों के सीने में नाराजगी धधक रही है। यह नाराजगी किसी दिन ज्वालामुखी का रूप ले सकता है। यही हाल भारतीय जनता पार्टी का भी है। नगर विधायक रितेश गुप्ता पर भाजपा ने भरोसा जताकर उन्हें दोबारा चुनावी दंगल में उतारा है।
ऐसे में टिकट के कई बड़े दावेदार मायूस हैं। उनकी मायूसी क्या गुल खिलाएगी यह तो बाद में पता चलेगा। कमोवेश यही स्थिति लगभग हर सीट पर है। जिसे टिकट मिल रहा है उसकी बल्ले-बल्ले, जिसे नहीं मिला उसके अरमानों पर पानी। ऐसे में नाराजगी को दल के दिग्गज किस रूप में लेते हैं इसी से पार्टी की जीत का मार्ग प्रशस्त होगा क्योंकि सर्वाधिक लंबी फेहरिस्त और अरमान भाजपा का टिकट पाने वालों की ही रही।
बात करें समाजवादी पार्टी की तो शहर और ग्रामीण विधानसभा सहित छह सीटों पर पार्टी ने अपने पत्ते अभी नहीं खोले हैं। ऐसे में सपा की आजकल में आने वाली सूची में किसका नाम शामिल होगा इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। कांग्रेस भी शेष चार सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा करने से पहले सपा की सूची आने का इंतजार कर रही है। जिससे अंसतुष्टों को कहीं और जाने का अवसर न मिले।
असंतोष से सीधे-सीधे किसी दल के पदाधिकारी भले ही इंकार करें लेकिन अंदरखाने सबको हकीकत का पता है। क्योंकि विरोधियों से निपटने की रणनीति तो पार्टियां पहले से बनाकर चल रही हैं लेकिन नाराज अपनों को साधना सबके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सचिन चौधरी कहते हैं कि पार्टी ने मुरादाबाद में दो सीटों पर प्रत्याशी उतारा है। उनकी जीत के लिए सभी मिलकर कार्य करेंगे। जहां तक नाराजगी की बात है टिकट पाने की चाहत रखना राजनीति में स्वाभाविक है। लेकिन यह सबको पता है कि एक सीट पर एक दावेदार को ही टिकट मिल सकता है। यदि कोई नाराज होगा भी तो उसे मना लेंगे।
