अल्मोड़ा: भाजपा की हैट्रिक तोड़ने को कांग्रेस ढूंढ रही ‘सियासी सूरमां’
बृजेश तिवारी, अमृत विचार, अल्मोड़ा। आजादी की लड़ाई में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए कुमाऊं की बारादोली के नाम से प्रसिद्ध सल्ट विधानसभा में लंबे समय तक सियासत करने वाली कांग्रेस आज यहां अपने सियासी वजूद के लिए छटपटा रही है। राज्य गठन के बाद शुरूआती दो चुनावों में इस विधानसभा में विजय पताका फहराने …
बृजेश तिवारी, अमृत विचार, अल्मोड़ा। आजादी की लड़ाई में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए कुमाऊं की बारादोली के नाम से प्रसिद्ध सल्ट विधानसभा में लंबे समय तक सियासत करने वाली कांग्रेस आज यहां अपने सियासी वजूद के लिए छटपटा रही है। राज्य गठन के बाद शुरूआती दो चुनावों में इस विधानसभा में विजय पताका फहराने वाली कांग्रेस पिछले तीन विधानसभा चुनाव व उपचुनाव में यहां करारी शिकस्त खा चुकी है। ऐसे में अब भाजपा के इस दुर्ग को दोबारा हासिल करने के लिए कांग्रेस पार्टी ऐसे सियासी सूरमां की तलाश कर रही है जो इन चुनावों में भाजपा को पटखनी दे सके।
अविभाजित उत्तर प्रदेश की बात करें तो तब सल्ट क्षेत्र रानीखेत विधानसभा का हिस्सा हुआ करता था। आजादी के बाद हुए चुनावों में तब इस विधानसभा सीट से कांग्रेस के अनेक दिग्गज नेताओं ने चुनाव लड़ा और यहां लंबे समय तक सियासत भी की। वर्ष 2000 में पृथक राज्य के गठन के बाद 2002 में हुए चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने इस सीट पर जीत हासिल की। कांग्रेस के रंजीत रावत तब यहां के विधायक बने। लेकिन 2007 में भिकियासैंण सीट को इस विधानसभा में मर्ज कर दिया गया और भिकियासैंण के विधायक रहे सुरेंद्र सिंह जीना इस सीट से भाजपा उम्मीदवार बनकर सामने आए।
जीना ने 2007 के चुनावों में जीत हासिल की और उसके बाद वह लगातार 2012 और 2017 के चुनावों में यहां कांग्रेस पार्टी को पटखनी देते आए। कांग्रेस से विधायक रहे रंजीत रावत 2007 में हुई हार को पचा नहीं पाए और उसके बाद उन्होंने रामनगर विधानसभा का रुख कर लिया। 2012 से अब तक कांग्रेस इस सीट पर स्याल्दे की पूर्व प्रमुख गंगा पंचोली पर दांव खेलती आई है। लेकिन हर बार पंचोली को नाकामयाबी हाथ लगी। विधायक सुरेंद्र सिंह जीना की मृत्यु के बाद हुए उपचुनाव में भी पंचोली इस सीट पर अपना दमखम नहीं दिखा पाई और महेश जीना इस सीट पर निर्वाचित घोषित किए गए।
सल्ट सीट पर लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस में इस सीट को लेकर खासी बेचैनी है। वर्ष 2022 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी से पूर्व प्रत्याशी गंगा पंचोली के अलावा रंजीत रावत के पुत्र ब्लॉक प्रमुख विक्रम रावत, रंजीत रावत के लंबे समय तक सिपहसालार रहे सोबन सिंह बोरा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अर्जुन सिंह और नारायण सिंह रावत अब इस सीट से दावेदार हैं। लेकिन इसके बाद भी प्रत्याशी का चयन टेड़ी खीर साबित हो रहा है। हालांकि कांग्रेस पार्टी इस बार इस चुनाव में ऐसे सूरमां को उतारना चाहती है जो भाजपा के दुर्ग को भेद सके। लेकिन पांच दावेदार होने के बाद भी उम्मीदवार का चयन अब पार्टी ने दिल्ली दरबार पर छोड़ दिया है।
परिवारवाद के चलते विक्रम पर संशय
अल्मोड़ा : कांग्रेस हाईकमान की परिवारवाद को बढ़ावा ना देने और एक परिवार से एक ही उम्मीदवार को टिकट देने की घोषणा के बाद अब सल्ट के ब्लॉक प्रमुख विक्रम रावत के टिकट पर संशय के बादल गहरा गए हैं। दरअसल कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष व विक्रम रावत के पिता पूर्व विधायक रंजीत रावत स्वयं रामनगर विधानसभा से कांग्रेस से टिकट मांग रहे हैं। अगर पार्टी ने उन्हें टिकट दिया तो सल्ट से विक्रम को टिकट मिलना मुश्किल हो जाएगा।
चार उम्मीदवारों में से किस पर दांव खेलेगी कांग्रेस
अल्मोड़ा : कांग्रेस पार्टी ने अगर विक्रम रावत को टिकट नहीं दिया तो मैदान में कांग्रेस के चार धुरंधर मैदान में रह जाएंगे। जिनमें पूर्व प्रत्याशी गंगा पंचोली के अलावा पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता सोबन सिंह बोरा, पूर्व जिपं सदस्य अर्जुन सिंह और नारायण सिंह रावत शामिल हैं। गंगा पंचोली और शोबन सिंह बोरा जहां कांग्रेस के पुराने सिपाही हैं। वहीं अर्जुन और नारायण भी युवाओं में अपनी गहरी पैठ रखते हैं। सूत्रों की मानें तो आज कल में कांग्रेस अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर देगी। ऐसे में अब देखना होगा कि पार्टी हाईकमान भाजपा के दुर्ग को भेदने की जिम्मेदारी अपने किस सिपाही को देती है। पार्टी के निर्णय को लेकर कार्यकर्ताओं में भी उत्सुकता बनी हुई है।
एक नजर में सल्ट विधानसभा
कुल मतदाता – 96241
पुरूष मतदाता – 49193
महिला मतदाता – 47048
जातिगत समीकरण – ठाकुर बाहुल्य सीट
