मीर्जापुर: मैकेनिक का अनोखा कारनामा, कबाड़ में पड़े साइकिल के सामान से बनाई बाइक

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मिर्जापुर। जिले के छानबे विकाश खण्ड के रामपुर सौनहा गावं के साइकिल पंचर मैकेनिक लक्षनधारी ने अनोखा कारनामा कर दिखाया। कबाड़ की दुकान से पुरानी बाइक के खराब हुए सामान से साइकिल से बाइक बनाकर सभी को चौंका दिया। 60 किमी घंटे की रफ्तार से चलने वाली इस साइकिल पर दो से तीन लोग बैठ …

मिर्जापुर। जिले के छानबे विकाश खण्ड के रामपुर सौनहा गावं के साइकिल पंचर मैकेनिक लक्षनधारी ने अनोखा कारनामा कर दिखाया। कबाड़ की दुकान से पुरानी बाइक के खराब हुए सामान से साइकिल से बाइक बनाकर सभी को चौंका दिया। 60 किमी घंटे की रफ्तार से चलने वाली इस साइकिल पर दो से तीन लोग बैठ सकते है।

मैकेनिक ने साइकिल का नाम दिया रिसर्च साइकिल

मैकेनिक लक्षनधारी ने अपनी खोज को रिसर्च साइकिल का नाम दिया है, रिसर्च साइकिल देखने के लिए ब्लॉक पर लोगों की खासी भीड़ इकट्ठा रही। कहते है प्रतिभा पहचान की मोहताज नहीं हैं इस कहावत को चरितार्थ किया है छानबे विकाश खण्ड के रामपुर सौनहा के मामूली साइकिल मैकेनिक लक्षन धारी बिंद ने जिन्होंने अपनी लगन और मेहनत से कबाड़ की दुकान में बेकार पड़े बाइक के कल पूर्जो से साइकिल से बाइक बनाकर सबको हैरत में डाल दिया।

अपनी बनाई हुई साइकिल को मैकेनिक लक्षनधारी धारी ने रिसर्च साइकिल का नाम दिया है लक्षनधारी बताते हैं कि पेट्रोल डीजल के बढ़ते दामों आजीज आकर उन्होंने इस साइकिल को बनाया है। साइकिल को बाइक बनाने में 3 महीने 18 दिन का समय तथा 20 हजार की लागत आयी है। यह अनोखी साइकिल 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सड़कों पर फर्राटा भरने में सक्षम है जिसपर दो से तीन लोग बैठ सकते हैं।

मैकेनिक लक्षनधारी ने कहा कि उनकी इक्षा है कि यदि उन्हें कुछ सरकारी सहयोग मिले तो वे इससे बेहतर हवा से चलने वाली साइकिल भी बना सकते है, उन्होंने कहा कि साइकिल कंपनियों को इसे देखकर बेहतर तकनीकी की साइकिल कम बजट में बनाई जाए जिसे उनका नाम रिसर्च साइकिल दिया जाए।

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