यूपी चुनाव 2022: अयोध्या में आधी आबादी पर बड़े दलों ने आज तक नहीं जताया भरोसा

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Edited By Amrit Vichar
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अयोध्या। रामनगरी जहां राम का नाम लेने से पहले सीता का नाम लिया जाता है। सुबह-शाम सीताराम का जाप होता है। वहां विधानसभा चुनाव में कभी भी महिला दावेदारों की भागीदारी नहीं देखी गई। बड़े राजनीतिक दलों ने भी आधी-आबादी पर भरोसा नहीं जताया। यह हाल तब है जब सभी दल महिलाओं के राजनीति में …

अयोध्या। रामनगरी जहां राम का नाम लेने से पहले सीता का नाम लिया जाता है। सुबह-शाम सीताराम का जाप होता है। वहां विधानसभा चुनाव में कभी भी महिला दावेदारों की भागीदारी नहीं देखी गई। बड़े राजनीतिक दलों ने भी आधी-आबादी पर भरोसा नहीं जताया। यह हाल तब है जब सभी दल महिलाओं के राजनीति में 33 प्रतिशत आरक्षण का राग अलापते हैं। अयोध्या विधानसभा क्षेत्र से अब तक पुरुष प्रत्याशियों का ही दबदबा रहा है। हालांकि जिला पंचायत और पंचायतों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी है, लेकिन वहां भी महिलाएं रबर स्टैम्प की तरह ही हैं। यहां महिलाएं जिला पंचायत अध्यक्ष और पार्षद तो चुनी गई लेकिन सूबे की बड़ी पंचायत तक उनकी नुमाइंदगी आज तक नहीं हो सकी।

प्रदेश की सियासत में 1964 में अपने वजूद में आई अयोध्या विधानसभा क्षेत्र से आज तक आधी आबादी का प्रतिनिधित्व नहीं हो सका। पहले सदर विधानसभा का हिस्सा रही अयोध्या सीट से आज तक पुरुषों का ही दबदबा बना रहा। चुनावी इतिहास के आईने पर नजर दौड़ाई जाए तो यहां से 1967 के चुनाव में जनसंघ पार्टी से बृजकिशोर अग्रवाल ने जीत हासिल की। इसके बाद 1969 में अयोध्या विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विश्वनाथ कपूर ने विजय हासिल की। 1974 में इस सीट पर जनसंघ से वेदप्रकाश अग्रवाल विजयी हुए। इसके बाद जनसंघ का तिलिस्म टूटा और 1977 में जनता पार्टी से जयशंकर पांडेय ने अयोध्या सीट पर अपनी विजय का परचम लहराया। इसके बाद 1980 में यहां पहली बार कांग्रेस ने खाता खोला और निर्मल खत्री जीते।

फिर 1985 में कांग्रेस के खाते में यह सीट गई और सुरेन्द्र प्रताप सिंह विधायक चुने गए। एक बार फिर 1989 में इस सीट पर सियासत ने पलटी मारी और जनता दल से जयशंकर पांडेय ने विजय हासिल की। इसके बाद अयोध्या में राम मंदिर आन्दोलन चढ़ा तो लल्लू सिंह ने बागडोर संभाली। लल्लू सिंह 1991 से 2007 तक पांच बार विधायक चुने गए। इसके बाद यहां से समाजवादी पार्टी के तेज नारायण पांडेय 2012 में विधायक चुने गए और प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री भी बने। इसके बाद केन्द्र में मोदी सरकार बनी तो 2017 की मोदी लहर में यहां से वेदप्रकाश गुप्ता ने जीत दर्ज कराई। इस बार भी इस सीट से किसी भी दल से महिला उम्मीदवार नहीं दिखाई दे रही है।

छोटे दलों ने जताया विश्वास पर खरी नहीं उतरी

अयोध्या संसदीय क्षेत्र में पांच विधानसभाएं हैं, जिसमें अयोध्या, गोसाईगंज, बीकापुर, रूदौली व मिल्कीपुर शामिल हैं। 1996 और 2012 के विधानसभा चुनाव में छोटे दलों ने महिलाओं पर विश्वास जताया पर वह खरी नहीं उतरीं और एक हजार वोट भी ना पा सकीं। 1996 में भूमि जोटक समूह से गायत्री देवी ने अयोध्या विधानसभा से चुनाव लड़ा था। वह महज 414 वोट ही प्राप्त कर सकी थीं। इसके बाद 2012 में मानवतावादी समाज पार्टी से 2012 में अर्चना सिंह ने विधानसभा चुनाव लड़ा। वह भी 924 वोट ही पा सकी थीं।

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गोसाईगंज में 2012 में अपना दल से माधुरी सिंह (3582), राष्ट्रीय लोकमंच से शालिनी सिंह (393) व मौलिक अधिकार पार्टी से संगीता (294) चुनाव लड़ा था। वहीं रूदौली में 1985 में मात्र दो महिलाओं ने चुनाव लड़ा था। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर कमरून निशान (1052) व निर्मला (125) मत प्राप्त कर सकी थीं। मिल्कीपुर में 1996 में राजकुमारी एनएमएनपी पार्टी से (328) वोट प्राप्त कर सकी थीं। 2007 में जनमोर्चा दल से सुधा सिंह (929) व गया देवी (810) वोट प्राप्त कर सकी थीं।

2012 में सावित्री देवी ने अपना दल से (2402) वोट प्राप्त किया था। बीकापुर से 1991 में निर्दलीय प्रत्याशी रत्ना देवी (349), 1993 में निर्दलीय रत्ना देवी (420), निर्दलीय प्रत्याशी कालिंदी (300) वोट पाई थीं। 2002 में रजनी देवी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर (419), 2007 में अपना दल से सरिता सिंह (39573), 2012 में निर्दलीय प्रत्याशी अरुणिमा तिवारी (1890) व 2017 में भाजपा से शोभा सिंह चौहान विजयी हुई थीं। शोभा सिंह एकमात्र ऐसी प्रत्याशी हैं जो विधानसभा सदस्य रहीं। इसका लाभ उन्हें पति रालोद के कद्दावर नेता मुन्ना सिंह चौहान की वजह से मिला।

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