भाजपा की कैंट विधानसभा सीट को लेकर पार्टी में गहमागहमी,कौन होगा उम्मीदवार?

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ। भाजपा इन दिनों विधानसभा सीटों को लेकर मंथन कर रही है। ऐसे में कई सीटों का निपटारा भी कर चुकी है। इसी कड़ी में लखनऊ कैंट विधानसभा सीट इन दिनों हॉट सीट का मुद्दा बनी हुई है। इसकी खास वजह भाजपा के दिग्गज नेताओं की नजर इस सीट पर है। वजह यह है कि …

लखनऊ। भाजपा इन दिनों विधानसभा सीटों को लेकर मंथन कर रही है। ऐसे में कई सीटों का निपटारा भी कर चुकी है। इसी कड़ी में लखनऊ कैंट विधानसभा सीट इन दिनों हॉट सीट का मुद्दा बनी हुई है। इसकी खास वजह भाजपा के दिग्गज नेताओं की नजर इस सीट पर है। वजह यह है कि भारतीय जनता पार्टी की कैंट विधानसभा सीट सबसे सुरक्षित मानी जाती है।

भाजपा इस सीट पर 6 बार जीत दर्ज कर चुकी है। अब यह तो समय बताएगा कि किसके हाथ यह सीट लगती है, लेकिन जोर आजमाइश का दौर जारी है।

यह 8 नाम है चर्चा में

लखनऊ कैंट विधानसभा सीट के लिए भाजपा खेमे में 8 नेताओं का नाम चर्चा में है। भाजपा नेतृत्व ने तय किया है कि मुख्यमंत्री के साथ उप मुख्यमंत्रियों को मैदान में उतारा जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सिराथू से उम्मीदवार घोषित किए जा चुके हैं। दिनेश शर्मा में रहने के बाद सीधे उपमुख्यमंत्री बना दिए गए थे।

बाद में उन्हें विधान परिषद सदस्य बनाया गया। इस बार उन्हें भी चुनाव लड़ाई जाने की तैयारी है। पार्टी में चर्चा है कि दिनेश शर्मा की नजर भी कैंट सीट पर है। हालांकि अभी इस पर फैसला नहीं हुआ है कि वह किस सीट से चुनाव लड़ेंगे, लेकिन यह तो तय है कि उन्हें लखनऊ के किसी सीट से विधानसभा में उतारा जाना तय माना जा रहा है।

रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस से लखनऊ कैंट से विधायक रह चुकी हैं। कांग्रेस से भाजपा में आने के बाद भी वह विधायक चुनी गई। वर्ष 2019 में भाजपा के टिकट पर लोकसभा के लिए चुनी गईं। वह चाहती हैं कि उनके बेटे मयंक जोशी को यहां से टिकट दे दिया जाए। इसके लिए वह लगातार पैरवी करने में जुटी हुई हैं। रेशू भटिया- मेयर संयुक्ता भाटिया की बहू हैं।

रेशू के ससुर सतीश भाटिया यहां से दो बार लगातार विधायक रह चुके हैं। इसलिए मेयर संयुक्ता भाटिया चाहती हैं कि उनकी बहू को यहां से टिकट दिया जाए। उन्होंने कैंट क्षेत्र में पोस्टर व बैनर भी पहले लगवा रखे थे।

भाजपा के मौजूदा विधायक सुरेश तिवारी भी टिकट पाने की लाइन में हैं। वह चार बार विधायक रह चुके हैं। पार्टी में चर्चा है कि उनकी उम्र 64 वर्ष हो चुकी है, लिहाजा पार्टी किसी युवा को मौका दे सकती है।

इसके साथ सपा के टिकट से चुनाव लड़ चुकी अपर्णा यादव भी अब भाजपाई हो चुकी हैं। हालांकि, उनके बारे में कहा जा रहा है कि वह पार्टी के लिए काम करेंगी और इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगी। अब यह तो समय बताएगा कि किसके खाते में यह सीट जाती है, लेकिन इस सीट के लिए भाजपा के अंदर जद्दोजहद जारी है।

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