लखनऊ: नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाले पिता-पुत्र गिरफ्तार
लखनऊ। लोगों को राष्ट्रपति भवन, ब्रिटिश व अमेरिकन एंबेसी तक नौकरी दिलावाने का दावा कर ठगी करने वाले नटवरलाल पिता और पुत्र को सुबह यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। एसटीएफ ने गिरोह के मास्टरमाइंड पिता के पास से कई अहम दस्तावेज, मुहर, फर्जी नियुक्ति पत्र, नकदी समेत कार बरामद की है। पकड़े गए आरोपी …
लखनऊ। लोगों को राष्ट्रपति भवन, ब्रिटिश व अमेरिकन एंबेसी तक नौकरी दिलावाने का दावा कर ठगी करने वाले नटवरलाल पिता और पुत्र को सुबह यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। एसटीएफ ने गिरोह के मास्टरमाइंड पिता के पास से कई अहम दस्तावेज, मुहर, फर्जी नियुक्ति पत्र, नकदी समेत कार बरामद की है। पकड़े गए आरोपी की पहचान मास्टरमाइंड राजेश गुप्ता समेत उसके बेटे के रूप में हुई है। दोनों काकोरी के दुर्गागंज के रहने वाले हैं। ये लोग दुबग्गा कन्हैया माधवपुरी कालोनी में मकान लेकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का गिरोह चला रहे थे।
2021 में दर्ज हुआ था मुकदमा
दोनों के खिलाफ मथुरा निवासी त्रिभुवन सिंह ने रिफाइनरी थाने में पिछले साल ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि इन लोगों ने बेटे और बेटी को सीआरपीएफ में मुख्य आरक्षी के पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर 25 लाख रुपये ठग लिए थे। रुपये लेने के बाद दोनों ने माप-तौल, लिखित परीक्षा, स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए कूटरचित दस्तावेज देकर डीआईजी, सीआरपीएफ अजमेर राजस्थान भेजा। वहां पता चला कि कोई भर्ती ही नहीं निकली थी।
कई बार मास्टरमाइंड हो चुका है निलंबित
एसटीएफ की पूछताछ में सामने आया है कि मास्टरमाइंड राजेश गुप्ता कई बार सरकारी नौकरी से निलंबित और निकाला गया। इसके चलते उसको विभागों की नौकरी के विषय में काफी जानकारी हो गई। राजेश गुप्ता 1989 में जीपीओ लखनऊ के कैंटीन में बतौर सेल्समैन नियुक्त हुआ था। 2002 में उसे बर्खास्त कर दिया गया। 17 महीने बाद फिर से बहाल हुआ । 2005 में फिर निलंबित कर दिया गया। उसने कई सरकारी विभागों में स्थाई और संविदा पर नियुक्ति कराने के लिए जाल बिछाने लगा। इस दौरान उसने कई लोगों की अपने पहचान के अधिकारियों से मिन्नतें कर संविदा पर नौकरी दिलवाई। उन्हीं का उदाहरण देकर अन्य बेरोजगारों को अपने जाल में फंसाने लगा। जबकि कुछ दिनों बाद उनकी नौकरी चली भी गई थी।
नटवरलालों के ये लोग हुए ठगी का शिकार
एसटीएफ एसपी विशाल विक्रम सिंह के अनुसार इन दोनों ने सैकड़ों लोगों से ठगी की है। कानपुर के शुभम चौहान से 3.50 लाख, सिद्धार्थनगर के सिब्बू पांडेय से 4 लाख, इटावा के सुशील यादव से 2.70 लाख, रमाशंकर शुक्ला से 50 हजार, मथुरा के त्रिभुवन सिंह से 25 लाख रुपये 2016 से 2019 के बीच में ठगी हुई। जिसकी इन लोगों ने शिकायत की। ये दोनों राष्ट्रपति भवन, ब्रिटिश व अमेरिकन एंबेसी तक में नौकरी दिलावाने का दावा किया था। इसके साथ ही भारतीय खाद्य निगम एफसीआई, रेलवे, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, मेट्रो, विद्युत विभाग, शिक्षा विभाग, 108 एंबुलेंस, सीएचसी, सीआरपीएफ में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी कर रहे थे।
टीम को क्या सामान हुआ बरामद
आरोपियों के पास से 12 मोबाइल, एक लैपटॉप, एक प्रिंटर, 6 चेकबुक, 3 पास बुक, 12 चेक, 23 सादा आईडी कार्ड, 9 नाम पता लिखा आईडी कार्ड, 8 स्टाम्प पेपर, 91 बायोडाटा शैक्षिक दस्तावेज के साथ, 5 कूटरचित नियुक्ति पत्र, एक ड्यूटी पास, एक पहचान पत्र जीपीओ, दो मुहर, 397 दस्तावेजों की प्रतियां, 123 फोटो, 4 ऑफर लेटर, 2 चार पहिया वाहन, 18 हजार रुपये नकद बरामद हुए ।
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