चुनावी मुद्दा : आश्वासन देकर कई पहुंचे राजधानी, चौड़ा पुल बना यक्ष पश्न

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आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। आजादी के बाद ढेला नदी पर पुल की मांग उठी। लोगों की मेहनत रंग भी लाई। साल 1957 में पुल का निर्माण भी हो गया। कालांतर में पुल कमजोर होता गया। मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ा तो पुल के चौड़ीकरण की मांग शुरू हो गई। लेकिन, चौड़े और मजबूत पुल की …

आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। आजादी के बाद ढेला नदी पर पुल की मांग उठी। लोगों की मेहनत रंग भी लाई। साल 1957 में पुल का निर्माण भी हो गया। कालांतर में पुल कमजोर होता गया। मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ा तो पुल के चौड़ीकरण की मांग शुरू हो गई। लेकिन, चौड़े और मजबूत पुल की वकालत को चुनावी चाशनी में तर करने वाले इसे भूल गए। नतीजतन यह मांग अब तक यक्ष प्रश्न ही बनी हुई है।

अबकी फिर जनता के मत पर चुनावी वैतरणी पार करने वाले तरह-तरह के आश्वासन दे रहे हैं। मुद्दा इस बार भी मौजू है, क्योंकि यूपी से उत्तराखंड को जोड़ने वाला भोजपुर का यह पुल समस्या बना हुआ है। बीते साल इसकी मरम्मत में 1.90 करोड़ रुपये खर्च किए गए। लेकिन, पुल की सूरत और सीरत बदलना अभी भी बाकी है। मुरादाबाद-टिहरी मार्ग का यह अहम पुल राजनीतिक संकल्प पर सवाल बनकर खड़ा है। यहां वाहनों का जाम लगना आम है।

सड़क से लेकर संसद के सदन तक चौड़े पुल की मांग रखी जा चुकी है। लेकिन, बात दिखावा और छलावा से अधिक कुछ नहीं है। राज्य की सीमा पर हरियावाला चौराहा एवं काशीपुर की फैक्ट्रियों के कच्चे माल लेकर भारी वाहन इस पुल को रोजाना पार करते हैं। देश और विदेश से जिम कार्बेट पार्क, गिर्जिया देवी के मंदिर एवं नैनीताल को जाने वाले सैलानियों के वाहन भी इस पुल से होकर गुजरते हैं। पुल की चौड़ाई 4.15 और लंबाई 90 मीटर है।  वर्ष 2020 में जिला योजना समिति की बैठक में भी जर्जर पुल के पुनर्निर्माण की मांग की गई थी। ठाकुरद्वारा के विधायक नवाब जान ने इस मुद्दे पर प्रभारी मंत्री का ध्यान खींचा था। मुरादाबाद देहात के विधायक हाजी इकराम कुरैशी कहते हैं कि इस प्रकरण हमने कई बार सरकार के सामने रखा।

सांसद डॉ. एसटी हसन ने कहा कि लोक महत्व के इस मुद्दे को लेकर हमने संसद में बात रखी थी। इस मुद्दे पर सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी की ओर से जानकारी दी गई कि इस सड़क का राष्ट्रीय राजमार्ग में अधिग्रहण हो गया है। बहुत जल्द मुरादाबाद-टिहरी मार्ग चार लेन में बनाई जाएगी। इस दौरान भोजपुर में दो नए पुलों का निर्माण होगा। इस दौरान लोक निर्माण विभाग की ओर से पुल की मरम्मत करा दी गई है। इस पुल से वन वे आधार पर भारी वाहनों का आवागमन हो रहा है। इस पुल को मुद्दा बनाकर कई दलों के उम्मीदवार चुनाव पड़ चुके हैं। इस रास्ते से सैलानी जिम कार्बेट पार्क भी जाते- आते हैं। सालों से इस सड़क की भी दशा खराब है। इससे राज्य की भी बदनामी हो रही है। इसलिए भी हमने संसद में सवाल उठाया था। कब तक सड़क बनेगी यह तो सरकार ही जाने।

पुल मरम्मत के लिए 1.90 करोड़ रुपये मिले थे। इस दौरान यातायात बहाल रखने के लिए डायवर्जन मार्ग बनाए गए। चूंकि, यह दो राज्यों को जोड़ने वाला अहम मार्ग है, इसलिए भारी वाहनों का आवागमन होता है। मरम्मत के दौरान यहां मजबूत सड़क का भी निर्माण करना पड़ा था। -लक्ष्मीनारायण, अधिशासी अभियंता, लोनिवि

मुरादाबाद-टिहरी राजमार्ग पर गांव गणेश पुर व देवीपुरा के बीच स्थित 60 दशक पुराना ढेला नदी का पुल सिंगल लाइन का होने के कारण पुल पर जाम लगा रहता है। इसकी चौड़ाई बढ़ाना जरूरी है। -मो. असलम, पूर्व प्रधान (गणेशपुर)

यूपी और उत्तराखंड को जोड़ने वाला ढेला नदी का पुल गांव से लगा है। वाहनों का आवागमन अधिक होने और पुल की चौड़ाई कम होने की बजह से जाम लगने से यात्रियों को परेशानी होती है। -जिले हसन, प्रधान (आदमपुर)

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