बरेली: सपा में पहली लाइन के यादव नेता खुश तो दूसरी लाइन मायूस
बरेली,अमृत विचार। समाजवादी पार्टी में यादव नेता नाखुश चल रहे हैं। पार्टी में वरिष्ठों को साइड लाइन कर दिए जाने से वे पहले से ही नाखुश हैं। अब दूसरी लाइन के यादव नेता भी नाराज नजर आ रहे हैं। विधानसभा चुनाव में यादव इस बार पूरी तरह आउट हैं। उन्हें पार्टी में तीसरी लाइन के …
बरेली,अमृत विचार। समाजवादी पार्टी में यादव नेता नाखुश चल रहे हैं। पार्टी में वरिष्ठों को साइड लाइन कर दिए जाने से वे पहले से ही नाखुश हैं। अब दूसरी लाइन के यादव नेता भी नाराज नजर आ रहे हैं। विधानसभा चुनाव में यादव इस बार पूरी तरह आउट हैं। उन्हें पार्टी में तीसरी लाइन के यादव नेता को महत्व मिलना भी हजम नहीं हो रहा है।
बात करते हैं पहली लाइन की। पार्टी में पहली लाइन के नेताओं मे रवि बाबू यादव, वीरपाल सिंह यादव, महिपाल सिंह यादव, विजेन्द्र सिंह यादव आदि नेताओं के नाम आते हैं। इन नेताओं को पार्टी ने पहले ही साइड लाइन कर दिया। प्रसपा से वीरपाल सिंह यादव टिकट की आस लगाए थे उन्हें टिकट नहीं मिला। वे घर बैठ गए। महिपाल भी आंवला से टिकट के दावेदार थे।
उन्हें भी साइड कर दिया। पहली पंक्ति के इन नेताओं का जिले की यादव बिरादरी में खासा दखल है। आंवला, कैंट, भोजीपुरा, फरीदपुर, बिथरी चैनपुर सीट पर यादव वोटर की संख्या ज्यादा है। फरीदपुर में यादव वोटर पार्टी से खासा नाराज चल रहा है। उन्हें कैसे पार्टी के पक्ष में करना है यह कुव्वत वरिष्ठों में ही है। जिनको पार्टी ने इज्जत नहीं बख्शी।
उन्हें संतुष्टि इस बात की है कि तीसरी पंक्ति के नेता उनसे मिलने जा रहे हैं। अब दूसरी पंक्ति की बात करें तो इसमें शुभलेश यादव, अरविंद यादव, सत्येन्द्र यादव, रवीन्द्र यादव, सूरज यादव, हरीशंकर, संजीव यादव आते हैं। शुभलेश को एक बार जिलाध्यक्ष बना भी दिया लेकिन अन्य अब भी पार्टी में मुकाम पाने को संघर्षरत हैं।
दूसरी पंक्ति के नेता इसलिए संतुष्ट थे कि वरिष्ठ नेताओं को साइड लाइन कर दिया है। पार्टी में उनकी पूछ बढ़ेगी लेकिन उन्हें भी मायूस कर दिया और बरेली में जन्मी और इंटर के बाद इलाहाबाद बनारस में पढ़ाई करने वाली तीसरी पंक्ति की नेता को चुनाव प्रभारी बना दिया गया, जिसे जिले में अपनी पहचान बतानी पड़ रही है।
हालांकि यादव नेताओं ने नाराजगी से इनकार किया है। तीसरी पंक्ति में नए युवा यादव नेता आते हैं। इसमें भुवनेश यादव, भूपेश यादव आदि छात्र सभा और युवा विंग के नेता आते हैं। इन्हीं के बीच की नेहा यादव को सभी के ऊपर चुनाव प्रभारी बनाकर भेजा गया है।
चुनाव में पहचान बतानी पड़ रही
बरेली में ही जन्मी नेहा यादव जिले की चुनाव प्रभारी हैं। वे मेहनत कर रही हैं। हर विधानसभाओं में जा भी रही हैं। नेहा ने सबसे पहले वरिष्ठ नेताओं के पास जाकर उनसे आशीर्वाद लिया है। वे इस बात से खुश हैं कि तीसरी पंक्ति की इस नेता ने उनका महत्व समझा है। जबकि दूसरी पंक्ति के नेताओं ने वरिष्ठों को सम्मान ही नहीं दिया।
पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नेहा को जिले में यादव वोटरों को साधने की जिम्मेदारी सौंपी। इस जिम्मेदारी को वे निभा तो रही हैं, लेकिन जिले की जनता के लिए वह नई हैं। उन्हें नेता तो जान रहे लेकिन जनता नहीं जान रही। सभाओं में नेता उनकी पहचान बताते हैं। अपने दौरों में वे यादव वोटरों से भी जरूर मिलती हैं।
चुनाव में यादव वोटर पार्टी से कितना जुड़ते हैं। यह रिजल्ट तो बताएगा ही साथ ही पार्टी अध्यक्ष का यादवों को साइड लाइन करने का प्रयोग भी कितना सफल होगा इसका भी परीक्षण तभी हो सकेगा।
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