मुरादाबाद : पीली सरसों ने लिखा, खत वसंत के नाम
मुरादाबाद, अमृत विचार। वसंत पंचमी के मौके पर साहित्यिक संस्था अक्षरा की ओर से काव्य एवं संगीत संध्या का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कवियों ने अपनी रचनाओं को सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रोताओं ने पूरे मन से सबको सुना और करतल ध्वनि से अच्छी रचनाओं का स्वागत भी किया। शनिवार को …
मुरादाबाद, अमृत विचार। वसंत पंचमी के मौके पर साहित्यिक संस्था अक्षरा की ओर से काव्य एवं संगीत संध्या का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कवियों ने अपनी रचनाओं को सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्रोताओं ने पूरे मन से सबको सुना और करतल ध्वनि से अच्छी रचनाओं का स्वागत भी किया।
शनिवार को प्रसिद्ध नवगीतकार डॉ. माहेश्वर तिवारी के आवास पर आयोजित कार्यक्रम का आरंभ मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलित कर किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. चंद्रभान सिंह यादव और गजलकार डॉ. कृष्ण कुमार नाज रहे। इसके बाद मां वाणी को वंदन किया गया। इसके बाद कवियों ने रचनाओं की छटा बिखेरी। नवगीतकार डॉ. माहेश्वर तिवारी ने वसंत गीत प्रस्तुत किया। उन्होंने हमसे दुनिया जहान की बातें, क्या हुईं फूल-पान की बातें, भूख पत्ते चबा रही है यहां, मत करो आसमान की बातें… सुनाकर खूब दाद बटोरी।
इसके बाद अध्यक्षता कर रहे हास्य-व्यंग्य कवि डॉ. मक्खन मुरादाबादी ने आजकल बड़ी अजीब सी जिंदगी जी रहे हैं हम, हमने दोस्तों के आंगन में गुलाब उगाए, लेकिन उनके कांटे हमारे ही कपड़े फाड़ने के काम आए… सुनाकर माहौल को गति दी। श्रेष्ठ वर्मा ने बहुत कुछ नया सा है अब मगर फिर भी सब कुछ वही है, कहानी किस्से नए हैं अब मगर लोग पुराने सब वही हैं… सुनाकर पुराने दिनों की याद दिलाई। कवयित्री विशाखा तिवारी ने रचना, पेड़ों को नव पल्लवों से सजाने वाले, मन में होरी-ठुमरी की मिठास घोलने वाले ऋतुराज तुम कहां विलय हो गए… पढ़ी।
कवि योगेंद्र वर्मा व्योम ने खुश हो कहा वसंत ने देख धरा का रूप, ठिठुरन के दिन जा चुके, जिओ गुनगुनी धूप। महकी धरती देखकर, पहने अर्थ तमाम, पीली सरसों ने लिखा, खत वसंत के नाम… सुनाकर माहौल को वासंती कर दिया। इसके अलावा शायर जिया जमीर, कवि राजीव प्रखर, साहित्यकार मनोज रस्तोगी, समीर तिवारी और डॉ. पूनम बंसल ने अपनी रचनाएं सुनाकर सभी को मंत्र-मुग्ध कर दिया।
