UP Elections 2022 : रामपुर की प्रत्येक सीट पर मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका में
अखिलेश शर्मा/अमृत विचार। प्रदेश के सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी 50.57 फीसदी वाला जिला होने की वजह से रामपुर जनपद प्रदेश में सबसे ज्यादा सुर्खियों में है। विधानसभा चुनाव में यहां की पांचों सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक माने जा रहे हैं। शहर सीट पर सबसे ज्यादा 72 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। लिहाजा यहां का समीकरण …
अखिलेश शर्मा/अमृत विचार। प्रदेश के सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी 50.57 फीसदी वाला जिला होने की वजह से रामपुर जनपद प्रदेश में सबसे ज्यादा सुर्खियों में है। विधानसभा चुनाव में यहां की पांचों सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक माने जा रहे हैं। शहर सीट पर सबसे ज्यादा 72 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। लिहाजा यहां का समीकरण अलग मिजाज का है। खास बात यह भी है कि यहां से मोहम्मद आजम खां सीतापुर जेल से चुनाव लड़ रहे हैं तो स्वार-टांडा विधानसभा क्षेत्र भी अहम सीट है। यहां आजम खां के बेटे अब्दुल्ला मैदान में हैं। माना जा रहा है कि जिले की पांचों सीटों पर मुस्लिम और हिंदू वोटों का धुव्रीकरण हार जीत तय करेगा। नगर सीट की आबादी में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 72 फीसदी है। वहीं हिंदू मतदाताओं की संख्या लगभग 28 से 30 फीसदी है। यहां दलित, वैश्य, कायस्थ और ब्राह्मण मतदाता भी मौजूद हैं।

इसके बाद भी इस सीट पर हमेशा मुसलमान उम्मीदवार ही जीतते आए हैं। यही नहीं, बीते 40 सालों में सिर्फ एक ऐसा मौका रहा है जब 1996 के चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार अफरोज अली खां ने आजम खां को मात दी। ऐसे में सवाल उठता है कि आजम खान की चुनावी मैदान से गैर मौजूदगी इस चुनावी गणित को कैसे बदलेगी। दूसरा सवाल है कि इस बार नवाब खानदान के वंशज नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां कांग्रेस से आजम खां के खिलाफ ताल ठोके हुए हैं। इससे पहले कभी नवाब खानदान से आजम खां के खिलाफ कोई मैदान में नहीं उतरा है। हमेशा आजम खां मुस्लिम वोटरों के फैक्टर से लगातार नौ बार जीतते चले आए।
आजम को कोई नुकसान पहुंचे या न पहुंचे। लेकिन, नवेद मियां की उम्मीदवारी से समीकरण पुराने जैसे नहीं दिखाई दे रहे हैं। भाजपा से आकाश सक्सेना मैदान में हैं। हिंदू भले ही कम हैं। लेकिन, अगर दो मुस्लिम कद्दावर नेता मैदान में हैं और मुस्लिम वोट बंटे और हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण हुआ तो भाजपा प्रत्याशी को फायदा हो सकता है। स्वार-टांडा सीट पर भी कुछ ऐसा ही नजारा है। इस बार भाजपा की जगह एनडीए में शामिल अपना दल एस के प्रत्याशी के रूप में नवाबजादा हैदर अली खां उर्फ हमजा मियां मैदान में हैं। सपा से अब्दुल्ला आजम फिर मैदान में हैं। यहां भी हिंदू-मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण और मुस्लिम वोटों का समीकरण है।
मुस्लिम कितना बंटेगा, यह हार-जीत तय करेगा। अगर मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण होता है तो एनडीए के प्रत्याशी का गणित बिगड़ सकता है। चमरौवा सीट पर भी मुस्लिम वोटों की संख्या 45 से 50 फीसदी है। ऐसे में सपा प्रत्याशी नसीर खां को तब मुश्किल होगी जब अन्य बसपा, कांग्रेस और आप से खड़े मुस्लिम प्रत्याशी मुस्लिम वोटों को कितना अपने पक्ष में ले जाएंगे। हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण भाजपा प्रत्याशी मोहन लोधी को फायदा पहुंचा सकता है। बिलासपुर विधानसभा सीट का समीकरण भी ऐसा ही है।
ये भी पढ़ें…
UP Elections 2022 : जातीय ध्रुवीकरण पर निर्भर करेगा परिणाम
97 लाख से अधिक मतदाता तय करेंगे प्रत्याशियों का भाग्य
