गंभीर चिंता
कोरोना की तीसरी लहर ने भी देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को कहा कि ओमिक्रॉन का असर हल्का रहा और यह जिस तेजी से फैला उसी तेजी से कम भी पड़ गया है, लेकिन उसके कारण आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार कमजोर पड़ी है। हालांकि …
कोरोना की तीसरी लहर ने भी देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को कहा कि ओमिक्रॉन का असर हल्का रहा और यह जिस तेजी से फैला उसी तेजी से कम भी पड़ गया है, लेकिन उसके कारण आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार कमजोर पड़ी है। हालांकि रबी फसलों की पैदावार का अच्छा रहना कृषि क्षेत्र और ग्रामीण मांग के लिए अच्छा संकेत है। संतोष की बात है कि आरबीआई वृद्धि के पुनरुद्धार के लिए उदार रुख को जारी रखेगा।
इस बीच आरबीआई गवर्नर ने साफ किया कि निजी क्रिप्टोकरेंसी वृहत आर्थिक और वित्तीय स्थिरता के लिए खतरा है तथा क्रिप्टोकरेंसी वित्तीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों से निपटने को लेकर आरबीआई की क्षमता को कमजोर करेगी। याद रहे आरबीआई पहले भी ऐसी संपत्तियों पर अपनी चिंता जता चुका है। लेकिन इस बार यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल में आम बजट में ऐसी संपत्तियों पर हुए लाभ पर 30 प्रतिशत कर लगाने की बात कही गई है।
2022-23 के बजट से साफ हो गया है कि सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने के मूड में नहीं है। क्रिप्टो हितधारकों ने इस कदम का स्वागत किया था, क्योंकि इससे उनके व्यापार को ‘वैधता’ मिलती है। जबकि उम्मीद की जा रही थी सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगा सकती है।
हालांकि वित्त सचिव टीवी सोमनाथन ने पिछले सप्ताह कहा कि जिस प्रकार सोना और हीरा मूल्यवान होने के बावजूद वैध मुद्रा नहीं है, निजी क्रिप्टोकरेंसी भी कभी वैध मुद्रा नहीं होंगी। यानि ऐसी संपत्तियों में कोई अंतर्निहित मूल्य नहीं है। दुनिया में केवल अल-सल्वाडोर ने ही पिछले साल सितंबर में बिटकॉइन को वैध मुद्रा के रूप में स्वीकार किया है।
किसी भी अन्य देश में क्रिप्टो को वैध मुद्रा का दर्जा नहीं मिला है। माना जाता है कि क्रिप्टोकरेंसी दुनिया के लिए आज का वित्तीय बुखार है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में स्टार्टअप प्रोजेक्ट लगातार तरक्की कर रहे हैं, जिनकी मदद से भारत क्रिप्टो मार्केट का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।
परंतु क्रिप्टोकरेंसी में निवेश काफी जोखिम भरा होता है, क्योंकि यह इंटरनेट की रहस्यमय दुनिया में चलने वाली ऐसी डिजिटल मुद्राएं होती हैं जिनके न तो मालिक का पता होता है और न स्रोत का। चूंकि इस तरह की आभासी मुद्राओं से देश की आर्थिक एवं वित्तीय स्थिरता को लेकर कई गहरी चिंताएं जुड़ी हुई हैं और क्रिप्टोकरेंसी में निवेशकों की संख्या को बढ़ा-चढ़ा कर बताया जा रहा है। इसलिए आरबीआई ने अपना कर्तव्य निभाते हुए निवेशकों को अपने जोखिम पर निवेश करने की चेतावनी दी है। कहा जा सकता है कि निवेशकों को आरबीआई की चेतावनी पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
