हल्द्वानी: कालाढूंगी में भीतरघात भाजपा के लिए साबित होगी मुसीबत

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Edited By Amrit Vichar
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हल्द्वानी, अमृत विचार। कालाढूंगी विधानसभा सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है। इसलिए यहां से कई लोग चुनाव लड़ने के लिए लालायित रहते हैं। हालांकि इस बार भी टिकट मौजूदा विधायक बंशीधर भगत को मिला। भीतरघात भाजपा के लिए समस्या बन सकती है। कालाढूंगी सीट पर भाजपा को बड़े पैमाने पर भीतरघात का सामना करना …

हल्द्वानी, अमृत विचार। कालाढूंगी विधानसभा सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है। इसलिए यहां से कई लोग चुनाव लड़ने के लिए लालायित रहते हैं। हालांकि इस बार भी टिकट मौजूदा विधायक बंशीधर भगत को मिला।

भीतरघात भाजपा के लिए समस्या बन सकती है। कालाढूंगी सीट पर भाजपा को बड़े पैमाने पर भीतरघात का सामना करना पड़ रहा है। सभी क्षेत्रों में भाजपा के भीतरघात सक्रिय रहे। माना तो यह भी जाता है कि सोशल मीडिया पर एक ऑडिया वायरल हो रहा है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि वह ऑडियो कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत का है। यह ऑडियो भी भाजपा में सक्रिय भीतरघातियों ने ही वायरल किया है। इस बार भगत को यहां से कांग्रेस प्रत्याशी के अलावा अपने पार्टी के लोगों से जूझना पड़ रहा है।

इस बार कालाढूंगी सीट पर नजदीकी मुकाबला देखने को मिल रहा है। जिस तरह के समीकरण बन रहे हैं उससे लग रहा है कि पांच से सात हजार वोटों के अंदर हार और जीत का अंतर तय हो सकता है। ऐसे में अगर भाजपा के भीतरघातियों ने दो से तीन हजार वोटों का भी पार्टी का नुकसान कर दिया तो पार्टी प्रत्याशी के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। भीतरघातियों ने बहुत ही शांत तरीके से अपने खास समर्थकों से कांग्रेस के पक्ष में प्रचार करने के लिए कहा था। जिससे पार्टी को नुकसान हो सके। यहां भगत के विरोधियों का मानना है कि अगर इस बार भगत हार जाते हैं तो उनकी इस सीट से दावेदारी खत्म हो जाएगी।

लेकिन आसान नहीं भगत को हराना
हल्द्वानी। कांग्रेस प्रत्याशी महेश शर्मा के आने के बाद मामला रोचक हो गया है। भाजपा में भीतरघातियों का भी बोलबाला रहा। इसके बावजूद बंशीधर भगत अपनी जमीनी पकड़ के चलते अभी भी यहां से जीत के प्रबल दावेदार बने हुए हैं। लोगों को सहज सुलभ हो जाना उनकी बड़ी खासियत है। यही नहीं वह अपने मतदाताओं के साथ सीधा संवाद कायम रखते हैं। क्षेत्र में पुराना नाम होने की वजह से उनकी यहां जड़े गहरी बनी हुई हैं। अगर भाजपा यहां से जीतती है तो यह भाजपा से ज्यादा भगत की जीत होगी।

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