हल्द्वानी: अंगुली में स्याही का निशान लगाए बगैर बुजुर्ग मतदाता से डलवाया वोट, उठे सवाल

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संजय पाठक, अमृत विचार, हल्द्वानी। विधानसभा चुनाव में मतदान करने को लेकर बुजुर्ग महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। कोई बजुर्ग महिला बेटे की गोद में तो कोई पति के सहारे के साथ मतदान केंद्र तक पहुंची। इन सबके बीच मतदान केंद्रों पर बुजुर्गों और महिला मतदाताओं को बदइंतजामियों का भी सामना करना पड़ा। …

संजय पाठक, अमृत विचार, हल्द्वानी। विधानसभा चुनाव में मतदान करने को लेकर बुजुर्ग महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। कोई बजुर्ग महिला बेटे की गोद में तो कोई पति के सहारे के साथ मतदान केंद्र तक पहुंची। इन सबके बीच मतदान केंद्रों पर बुजुर्गों और महिला मतदाताओं को बदइंतजामियों का भी सामना करना पड़ा। खालसा इंटर कॉलेज, नवाड़खेड़ा गौलापार समेत कालाढूंगी और लालकुआं विधानसभा के कई बूथों पर ऐसी तस्वीरें नजर आईं जहां बूथ पर लंबी कतार होने की वजह से महिलाओं को काफी देर तक खड़े रहना पड़ा। थक हार कर कई महिलाएं लाइन से दूर हटकर जहां जगह मिली वहीं बैठ गईं।

अंगुली में स्याही का निशान लगाए बगैर ही मतदान कर्मचारियों ने बुजुर्ग देवकी पटवाल से डलवाया वोट।

इन सबके बीच जवाहर ज्योति दमुवाढूंगा के पोलिंग बूथ पर भी एक बड़ी लापरवाही सामने आई जहां एक बुजुर्ग वोटर को अंगुली में बिना स्याही लगाए ही वोट दिलाने के बाद घर को विदा कर दिया गया। संगम विहार दमुवाढूंगा निवासी 72 वर्षीय देवकी पटवाल, दोपहर करीब डेढ़ बजे राजकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जवाहर ज्योति दमुवाढूंगा काठगोदाम, भाग संख्या 168 में वोट करने पहुंची थीं। घर पहुंचने पर उनके बच्चों ने अंगुली पर स्याही का निशान न होने की बाबत जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि मतदान अधिकारियों ने पहचान पत्र देखने के बाद सीधे वोट डालने भेज दिया जिसके बाद वह घर आ गईं। ऐसे में ड्यूटी पर तैनात मतदान कर्मियों की लापरवाही पर सवाल उठना लाजिमी है। वहीं बुजुर्ग महिला परिजन का कहना है कि यह एक गंभीर लापरवाही है। चुनाव आयोग का इसका संज्ञान लेना चाहिए।

अंगुलियां दिखातीं बुजुर्ग देवकी पटवाल।

इधर, महिला कॉलेज में बनाए गए सखी बूथ के बगल में प्रसूता विश्राम गृह बनाया गया था पर वह भी केवल नाम भर और बजट खपाने जैसा ही प्रतीत हुआ। इस कमरे के अंदर एक कोने में छोटे बच्चों के लिए खिलौने रखे गए थे मगर अफसोस कि यहां वोट डालने पहुंची तमाम महिलाओं को इस कक्ष के बारे में जानकारी ही नहीं थी, न कोई बताने वाला ही मौजूद था। महिला मतदाताओं का कहना था कि सखी बूथ केवल महिलाओं के लिए आरक्षित होता तो अच्छा होता पर इसमें एक ही दरवाजे से महिलाओं और पुरुषों को प्रवेश दिया जा रहा था, जिससे असहजता का सामना करना पड़ा। ऐसे में सखी बूथ की सार्थकता भी समझ से परे दिखाई दी।

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