महंगाई बड़ा संकट

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Edited By Amrit Vichar
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महंगाई लगातार बढ़ रही है। खुदरा महंगाई दर सात महीने बाद जनवरी में एक बार फिर भारतीय रिजर्व बैंक की तय ऊपरी सीमा छह प्रतिशत के पार चली गई है। इस दायरे से बाहर जाने के बाद महंगाई बड़ा संकट बन जाती है। इस साल जनवरी में यह दर छह दशमलव एक प्रतिशत पर पहुंच …

महंगाई लगातार बढ़ रही है। खुदरा महंगाई दर सात महीने बाद जनवरी में एक बार फिर भारतीय रिजर्व बैंक की तय ऊपरी सीमा छह प्रतिशत के पार चली गई है। इस दायरे से बाहर जाने के बाद महंगाई बड़ा संकट बन जाती है। इस साल जनवरी में यह दर छह दशमलव एक प्रतिशत पर पहुंच गई।

इसकी वजह से देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि और महंगाई के प्रबंधन को लेकर चुनौती बढ़ गई है। सांख्यिकी विभाग ने खुदरा महंगाई के जो आंकड़े जारी किए हैं, उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर देश भर के गांवों की तुलना में अधिक रही।

प्रदेश के गांवों में महंगाई दर, राष्ट्रीय स्तर के 6.12 फीसदी की तुलना में 7.23 फीसदी थी। आंकड़ों के अनुसार जनवरी में महंगाई बढ़ने का कारण खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ना रहा। उसे अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता। जनवरी में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर 10.33 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि दिसंबर-2021 में यह 9.56 प्रतिशत थी। जनवरी में सब्जियों के दाम पैंतीस प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गए, जबकि दिसंबर में यह आंकड़ा साढ़े इकतीस प्रतिशत था।

अनाज, दालें और धान भी महंगे हुए। देश महंगाई के साथ बेरोजगारी जैसे संकट से भी जूझ रहा है। ऐसे में बढ़ती महंगाई परेशानी का कारण बनती जा रही है। उन चीजों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं जो आम आदमी के प्रतिदिन के इस्तेमाल की हैं। हालांकि फिलहाल पूरी दुनिया के सामने महंगाई एक बड़ी चुनौती है।

जनवरी महीने में अमेरिका में महंगाई दर चार दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। रिटेल इंफ्लेशन रेट 7.5 फीसदी पर पहुंच गया जो फरवरी 1982 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। महंगाई बढ़ने के कारण फेडरल रिजर्व पर इंट्रेस्ट रेट बढ़ाने का दबाव बढ़ रहा है। दुनिया में कोविड के मामले घट रहे हैं, लेकिन भू राजनीतिक जोखिम बढ़ऩे की वजह से ऊर्जा की कीमतों के कारण महंगाई दर बढ़े स्तर पर बनी रहने की संभावना है।

इसके साथ वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों का जोखिम जुड़ा है। खुदरा क्षेत्र में गैर-खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ना भी चिंताजनक है। क्योंकि इनके दाम एक बार बढ़ जाने के बाद नीचे नहीं आने वाले। ऐसे में जब देश के पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव चल रहे हैं, महंगाई जैसे मुद्दे का सामान्यीकरण हो गया है और धर्म व जाति की महत्वपूर्ण भूमिका हो गई है। महंगाई का यही रुख बना रहा तो आम आदमी की परेशानियां कम होने वाली नहीं हैं।