कौन हैं चिकनपॉक्स की वैक्‍सीन खोजने वाले डॉ. मिचियाकी ताकाहाशी? जिन्हें समर्पित है आज गूगल का डूडल

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नई दिल्ली। गूगल आज यानि 17 फरवरी को जापानी वायरोलॉजिस्ट डॉ. मिचियाकी ताकाहाशी का जन्मदिन मना रहा है। ताकाहाशी मेडिकल साइंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने चिकनपॉक्स के खिलाफ पहला टीका विकसित किया था। यह अब तक दुनिया भर में लाखों बच्चों को लगाया जा चुका है। आज का डूडल …

नई दिल्ली। गूगल आज यानि 17 फरवरी को जापानी वायरोलॉजिस्ट डॉ. मिचियाकी ताकाहाशी का जन्मदिन मना रहा है। ताकाहाशी मेडिकल साइंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने चिकनपॉक्स के खिलाफ पहला टीका विकसित किया था। यह अब तक दुनिया भर में लाखों बच्चों को लगाया जा चुका है। आज का डूडल टोक्यो स्थित कलाकार तात्सुरो किउची द्वारा बनाया गया है।

कौन हैं डॉ. ताकाहाशी
डॉ. मिचियाकी ताकाहाशी का जन्म 1928 में जापान के ओसाका में हुआ था। वह 1974 की शुरुआत में चिकनपॉक्स के खिलाफ टीका विकसित करने वाले पहले व्यक्ति थे। डॉ. ताकाहाशी ने ओसाका विश्वविद्यालय से अपनी मेडिकल की डिग्री हासिल की और बाद में 1959 में उन्‍हें ओसाका विश्वविद्यालय के माइक्रोबियल रोग अनुसंधान संस्थान में एक शोधकर्ता के रूप में काम करने का मौका मिला। खसरा और पोलियो वायरस के अध्ययन करने के बाद, उन्‍होंने 1963 में अमेरिका के बायलर कॉलेज में एक रिसर्च फेलोशिप स्वीकार की।  इसी दौरान उनके बेटे को चिकनपॉक्स हो गया। इसके बाद डॉ. ताकाहाशी ने इस अत्यधिक संक्रामक बीमारी का मुकाबला करने की दिशा में अपनी विशेषज्ञता को मोड़ दिया और पूरी दुनिया का वैक्‍सीन का तोहफा मिला।

डॉ. मिचियाकी ताकाहाशी के चिकनपॉक्स के टीके का नाम ‘ओका’ है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा स्वीकार किया गया था और दुनिया भर में व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है। संक्रामक वायरल रोग और इसके संचरण के गंभीर मामलों को रोकने के लिए डॉ ताकाहाशी का टीका एक प्रभावी उपाय है।

1974 में डॉ. ताकाहाशी द्वारा बनाया गया टीका आज भी प्रयोग में है और लाखों बच्चों को संक्रामक वायरल रोग के गंभीर मामलों से बचाने में मदद कर रहा है। इम्यूनोसप्रेस्ड रोगियों के साथ बाद के कठोर शोध के बाद यह बेहद प्रभावी साबित हुआ। 1984 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुमोदित एकमात्र वैरिकाला वैक्सीन, 1986 में जापान में रिसर्च फाउंडेशन फॉर माइक्रोबियल डिजीज द्वारा शुरू की गई थी। डॉ. ताकाहाशी की मौत 16 दिसंबर 2013 को दिल का दौरा पड़ने से हो गई थी।

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