बरेली: शहर-कैंट विधानसभा में कम मतदान में कितना कारगर होगा नोटा

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बरेली, अमृत विचार। शहर और कैंट में मतदान कम होने का असर व्यापारियों के आंदोलन पर पड़ा है। कोहाड़ापीर -कुतुबखाना में पुल बनाने का विरोध व्यापारी कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने मतदान में नोटा का बटन दबाकर किसी भी दल के प्रत्याशियों को वोट नहीं देने का फैसला किया था। मतदान से पहले …

बरेली, अमृत विचार। शहर और कैंट में मतदान कम होने का असर व्यापारियों के आंदोलन पर पड़ा है। कोहाड़ापीर -कुतुबखाना में पुल बनाने का विरोध व्यापारी कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने मतदान में नोटा का बटन दबाकर किसी भी दल के प्रत्याशियों को वोट नहीं देने का फैसला किया था। मतदान से पहले वे नोटा बटन दबाने का प्रचार भी खूब कर रहे थे। दावा था कि 10 से 15 हजार नोटा पड़ेगा लेकिन हालात बता रहे हैं कि व्यापारियों का दावा पूरा नहीं हो पाएगा।

कुतुबखाना और कोहाड़ापीर के कई व्यापारी शहर और कैंट विधानसभा के वोटर हैं। ज्यादातर शहर क्षेत्र में आते हैं। यहां के व्यापारी जनप्रतिनिधियों के रवैये से नाराज चल रहे हैं। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों ने व्यापारियों की राय लिए बिना ही कुतुबखाना पर पुल बनाने की मंजूरी दे दी है। पुल बनने से व्यापारियों का व्यवसाय चौपट हो जाएगा। जब तक पुल बनेगा तब तक दुकानें बंद रहेंगी और दुकानों में काम करने वाले कर्मचारी भी घर बैठा दिए जाएंगे। मतदान के दिन तक सभी उत्साहित थे कि जमकर मतदान होगा।

लेकिन शाम को मतदान का आंकड़ा देखा गया तो शहर और कैंट में सबसे कम मतदान में वोटरों ने भाग लिया। इससे व्यापारियों का तो आंदोलन प्रभावित हुआ माना जा रहा है। व्यापारी भी इस बात को मानते हैं कि जब लोग वोट डालने ही नहीं निकले तो आंदोलन कैसे पूरा होता। अब वे भी मतगणना वाले दिन का इंतजार कर रहे हैं कि उनके प्रचार का कितना असर बाजार के अन्य व्यापारियों पर हुआ है।

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