दाऊदा का दस्ता

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक कार्य मंत्री नवाब मलिक को भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के सिलसिले में बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। पिछले सप्ताह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने खुलासा किया था कि दाऊद भारत में हमले कराने की फिराक में है। भारत …

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक कार्य मंत्री नवाब मलिक को भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के सिलसिले में बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। पिछले सप्ताह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने खुलासा किया था कि दाऊद भारत में हमले कराने की फिराक में है।

भारत को निशाना बनाने के लिए उसने एक विशेष इकाई का गठन किया है। इसके बाद गृहमंत्रालय के आदेश पर एनआईए ने दाऊद के खिलाफ यूएपीए के तहत ताजा मामला दर्ज कर जांच की शुरुआत की। वर्ष 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के मामले में दाऊद वांछित है। घटना के बाद दाऊद दुबई भाग गया था।

खबरों के मुताबिक इस समय वह पाकिस्तान में रह रहा है। वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर भारत के विरुद्ध काम करता है। दाऊद से कनेक्शन के आरोप में नवाब मलिक ईडी के रडार पर रहे हैं। मलिक पिछले कुछ महीनों से चर्चा में हैं, जब से उन्होंने स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) के मुंबई क्षेत्र के पूर्व निदेशक समीर वानखेड़े के विरुद्ध निजी और सेवा से जुड़े आरोप लगाए थे।

मलिक के दामाद समीर खान को गत वर्ष मादक पदार्थ के एक मामले में एनसीबी ने गिरफ्तार किया था।
उद्धव ठाकरे की सरकार में मंत्री के साथ ही वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं तथा पार्टी के मुंबई शहर के अध्यक्ष भी हैं। बता दें कि नवाब मलिक एनसीपी के दूसरे मंत्री है जिन्हें ईडी ने गिरफ्तार किया है।

इससे पहले गृहमंत्री अनिल देशमुख को गिरफ्तार किया गया था। नवाब मलिक ने अपना सियासी सफर समाजवादी पार्टी से शुरू किया था और वर्ष 2004 में सपा छोड़कर वे शरद पवार की पार्टी राकांपा में शामिल हो गए। मलिक की गिरफ्तारी के बाद महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में बयानबाजी शुरु हो गई है।

राकांपा की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि ईडी की कार्रवाई से राकांपा को कोई अचंभा नहीं हुआ है। केन्द्र में सत्तारुढ़ पार्टी अपनी ‘मशीनरी’ का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ ‘दमनकारी’ तरीके से कर रही है। वहीं भाजपा ने कहा कि इसे ‘प्रतिशोध की राजनीति’ बताने की बजाय ईडी को जांच पूरी करने दी जाए।

पार्टी उनके इस्तीफे की मांग कर रही है। मलिक राकांपा के राज्य स्तरीय नेता नहीं हैं। अगर उन्होंने कुछ संदिग्ध किया है तो इसकी जांच होनी चाहिए। देखना दिलचस्प रहेगा कि मलिक की गिरफ्तारी पर सियासी भूचाल कितना तेज होगा। क्योंकि गिरफ्तारी पर भाजपा उनका इस्तीफा मांग रही है और विपक्षी नेता मलिक के समर्थन में आ गए हैं।