रुद्रपुर: ..और गम में बदल गया खुशी का माहौल

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रुद्रपुर: अमृत विचार। छह महीने पहले घर में दूसरे बेटे का जन्म हुआ। शुक्रवार को उस शिशु के अन्न प्राशन संस्कार का आयोजन होना था। घर में खुशी का माहौल था और गोविंद गिरी भी इसी तैयारी में जुटे थे। कार्यक्रम के लिए ही वह घर से निकले थे लेकिन अचानक उनके आने से पहले …

रुद्रपुर: अमृत विचार। छह महीने पहले घर में दूसरे बेटे का जन्म हुआ। शुक्रवार को उस शिशु के अन्न प्राशन संस्कार का आयोजन होना था। घर में खुशी का माहौल था और गोविंद गिरी भी इसी तैयारी में जुटे थे। कार्यक्रम के लिए ही वह घर से निकले थे लेकिन अचानक उनके आने से पहले आई हादसे की सूचना ने खुशी के माहौल को गम में बदल दिया।

बागेश्वर के बैजनाथ के रहने वाले गोविंद गिरी वर्ष 2005 में पीएसी में भर्ती हुए थे, वर्ष 2017 में पदोन्नत होकर हेड कांस्टेबल बने। गांव के ही रहने वाले हरीश गिरी ने बताया कि रुद्रपुर में 46वीं वाहिनी पीएसी में तैनात गोविंद की ड्यूटी वर्तमान में देहरादून में थी। उन्होंने हल्द्वानी के पीलीकोठी में एक घर किराए पर लिया था।

बड़ा बेटा नमन आठ साल का है जबकि छोटा बेटा छह माह का है। उसी के अन्न प्राशन संस्कार के लिए जवान गोविंद 20 फरवरी से अवकाश पर हल्द्वानी आए हुए थे। रिश्तेदारों और दोस्तों को कार्यक्रम की जानकारी देने का सिलसिला चल रहा था। वह चाहते थे कि कार्यक्रम में सभी करीबी पहुंचे, इसके लिए कॉल कर तो उन्हें वह निमंत्रण दे ही रहे थे।

साथ ही कार्यक्रम में उपस्थित होने का आग्रह करने के लिए वह उनके घरों पर भी जा रहे थे। बताया जाता है कि इसी वजह से अपने जवान साथियों और रिश्तेदारों को निमंत्रण देने के लिए ही वह हल्द्वानी से बाइक से निकले थे। एक दिन बाद ही कार्यक्रम होना था इसकों लेकर घर में खुशी के माहौल के बीच तैयारी भी जोरशोर से चल रही थी। गुरुवार सुबह नौ बजे के बाद जब हादसे की सूचना घर पर पहुंची तो मातम छा गया, जहां खुशी थी वहां कोहराम मच गया और परिवार से लेकर रिश्तेदार और हर करीबी दुखी हो गया।

लापरवाही ने छीन लिया दो मसूमों के सिर से पिता का साया
रुद्रपुर। यातायात पुलिस को धता बताते हुए नियमों का उल्लंघन करने वाले की मनमानी ने दो मासूमों के सिर से पिता का साया छीन लिया। बड़ी लापरवाही यह भी है कि दिन में यह दुर्घटना हुई और पुलिस हादसा करने वाले वाहन का पता तक नहीं लगा सकी। हादसा करने के बाद वाहन कहां गायब हो गया, पुलिस को पता तक नहीं चला। अब पुलिस घटना स्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की मदद से उस वाहन का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

हेलमेट भी नहीं बचा सका जान
रुद्रपुर। दुर्घटना से बचाव के लिए हेलमेट को सुरक्षा कवच माना जाता है। लेकिन पीएसी जवान गोविंद गिरी की वह जान नहीं बचा सका। दुर्घटना के बाद जवान के सिर से खून बह रहा था और हेलमेट नजदीक ही पड़ा था। जवान ने हेलमेट पहना था लेकिन बताया जाता है कि टक्कर लगने के बाद जवान गिर गया और हेलमेट सिर से निकल गया, जिसके बाद वाहन का पहिया उसके सिर पर चढ़ गया और गोविंद गिरी की मौत हो गई।

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