शांति की कोशिश

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Edited By Amrit Vichar
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने शुक्रवार को कहा कि रूस ने यूक्रेन के लोगों को जो दर्द दिया है वो अकल्पनीय है। साथ ही साफ किया कि यूक्रेन में अमेरिका अपनी सेना नहीं भेजेगा। लगता है इससे विश्वयुद्ध की आशंका टल गई है। क्योंकि इस युद्ध में रूस और यूक्रेन के रूप में प्रत्यक्ष रूप …

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने शुक्रवार को कहा कि रूस ने यूक्रेन के लोगों को जो दर्द दिया है वो अकल्पनीय है। साथ ही साफ किया कि यूक्रेन में अमेरिका अपनी सेना नहीं भेजेगा। लगता है इससे विश्वयुद्ध की आशंका टल गई है। क्योंकि इस युद्ध में रूस और यूक्रेन के रूप में प्रत्यक्ष रूप से सिर्फ दो पक्ष हैं, लेकिन पिछले कुछ दिनों में इस मुद्दे पर जो अंतर्राष्ट्रीय तस्वीर उभरी है, उससे युद्ध का दायरा फैलने की आशंका भी जताई जा रही है।

दरअसल, अमेरिका सहित पश्चिमी देशों ने जिस तरह रूस के खिलाफ बहुस्तरीय प्रतिबंधों की घोषणा की है और यूक्रेन के पक्ष में नाटो की पहल का संकेत भी दिया है, वह समस्या के और जटिल होने का ही संकेत है। पश्चिमी देशों ने कहा कि रूस ने जिस तरह से एक स्वतंत्र देश को दो हिस्सों में बांटने का काम किया और फिर बाद में यूक्रेन में अपनी फौज दाखिल करा दी वो वैश्विक व्यवस्था के लिए सही नहीं है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर वेलेंस्की ने भी कहा कि इस हमले से लाखों लोगों की जिंदगी पर असर पड़ेगा।

अब अमेरिका के रूस के खिलाफ सेना न भेजने के फैसले पर कहा जा सकता है कि अफगानिस्तान से जिस तरह अमेरिकी सेनाएं वापस लौटी हैं, उसे देखते हुए अब अमरीका सेना नहीं भेजना चाहता हो। बहरहाल अमरीका का यह फैसला सही है कि वह सेना नहीं भेजेगा।
दूसरी ओर इस युद्ध से यह एक बार फिर सिद्ध हो गया कि संयुक्त राष्ट्र केवल दिखावे की संस्था है। जिस प्रकार रूस ने यूक्रेन से नाटो के संबंध और क्रीमिया पर अंतर्राष्ट्रीय रुख को अपनी कार्रवाई का आधार बताया है। ये मुद्दे अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र के सामने लंबे समय से मौजूद थे, मगर वक्त पर कूटनीतिक पहलकदमी नहीं होने के परिणाम रूसी हमले के रूप में सामने हैं और उसने दुनिया भर में शांति की इच्छा रखने वालों को निराश किया है।

याद रहे कि युद्ध की विभीषिका कभी भी बेहतर नतीजे नहीं ला सकती। उम्मीद की जानी चाहिए कि वैश्विक स्तर पर की जाने वाली शांति की कोशिशें सफल होंगी। भारत ने भी साफ कर दिया है कि विवाद के जो भी कारण हैं उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना चाहिए। युद्ध कोई नतीजा नहीं है। दोनों पक्षों को संयम से काम करने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत की थी और उनसे अपील की कि युद्ध को रोकना ही मानवता और वैश्विक व्यवस्था के लिए हितकारी होगा। साथ ही ताजा हालात के मद्देनजर भारत का वहां फंसे अपने नागरिकों को पोलैंड के रास्ते बाहर निकालने का फैसला उचित ही है।