नई लहर की आहट

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Edited By Amrit Vichar
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दुनिया में कोरोना महामारी की स्थिति में काफी सुधार आया है। देश में भी कोरोना के मामलों में कमी आई है। सोमवार को पूरे देश में 24 घंटों में आए नए मामलों की संख्या 8,013 दर्ज की गई। करीब दो महीने बाद संक्रमण के दैनिक मामले 10 हजार से कम हैं। लोगों को प्रतिबंधों से …

दुनिया में कोरोना महामारी की स्थिति में काफी सुधार आया है। देश में भी कोरोना के मामलों में कमी आई है। सोमवार को पूरे देश में 24 घंटों में आए नए मामलों की संख्या 8,013 दर्ज की गई। करीब दो महीने बाद संक्रमण के दैनिक मामले 10 हजार से कम हैं। लोगों को प्रतिबंधों से राहत मिल रही है लेकिन याद रखना चाहिए कि कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी का मतलब इसकी समाप्ति नहीं है। कुछ समय बाद इसकी नई लहर आने की आशंका बनी हुई है।

आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में कहा है कि भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की चौथी लहर 22 जून के आसपास आ सकती है और अगस्त के मध्य से अंत तक, यह चरम पर पहुंच सकती है। गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आगाह किया था कि कोरोना वायरस का ओमिक्रोन स्वरूप अंतिम स्वरूप नहीं होगा और अगला स्वरूप अधिक संक्रामक हो सकता है। पिछले सप्ताह डब्लूएचओ ने बताया था कि ओमिक्रोन के मूल वैरिएंट की तुलना में बीए.2 स्ट्रेन तेजी से बढ़ रहा है।

इसके कारण कई देशों में हालात बिगड़े हैं। वैज्ञानिक इसके सब-वैरिएंट के बढ़ते खतरे को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। कई शोध में दावा किया जा रहा है कि ओमिक्रॉन का सब-वैरिएंट बीए.2, मूल वैरिेएंट से कई गुना अधिक संक्रामक हो सकता है।

हालांकि यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के निदेशक डॉ. रोशेल वालेंस्की ने एक बयान में कहा कि वैसे तो ऐसे कोई सबूत नहीं हैं जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि बीए.2 स्ट्रेन, पिछले बीए.1 की तुलना में अधिक गंभीर है। आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर राजेश रंजन ने कहा है कि नई लहर में वायरस क्षेत्रवार ही सक्रिय हो सकता है। आश्वस्त हुआ जा सकता है कि हालात पहली और दूसरी लहर जैसे नहीं होंगे। महामारी विज्ञानी एरिक फेंग कहते हैं जो लोग पहले बीए.1 से संक्रमित रह चुके हैं, उनके बीए 2 से संक्रमित होने की संभावना कम है।

हालांकि यह कितनी असरदार होगी इसे स्पष्ट कहा नहीं जा सकता है। कोरोना के इस नए खतरे को लेकर हमें भी बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। भीड़ वाली बंद जगहों, ट्रेन-बस में मास्क जरूर पहनें। कुल मिलाकर हालात अच्छे हैं, लेकिन खराब भी हो सकते हैं। दूसरी लहर के सबक याद रखें।