समय की जरुरत

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Edited By Amrit Vichar
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युद्ध प्रभावित यूक्रेन में भारतीय छात्र एवं नागरिक विषम परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। यूक्रेन के खारकीव शहर में यूक्रेनी सैनिकों और रूसी सेना के बीच भीषण लड़ाई हो रही है। खारकीव में मंगलवार सुबह गोलाबारी में एक भारतीय छात्र की मौत हो गई। रूस के हमले के बाद यूक्रेन में जारी युद्ध में …

युद्ध प्रभावित यूक्रेन में भारतीय छात्र एवं नागरिक विषम परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। यूक्रेन के खारकीव शहर में यूक्रेनी सैनिकों और रूसी सेना के बीच भीषण लड़ाई हो रही है। खारकीव में मंगलवार सुबह गोलाबारी में एक भारतीय छात्र की मौत हो गई। रूस के हमले के बाद यूक्रेन में जारी युद्ध में यह किसी भारतीय की मौत का पहला मामला है। यूक्रेन में बिगड़ती स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।

भारत पहले ही रूसी और यूक्रेनी दूतावासों के साथ खारकीव और संघर्ष वाले अन्य शहरों से छात्रों सहित भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षित मार्ग की आवश्यकता का मुद्दा उठा चुका है। विदेश सचिव रूस और यूक्रेन के राजदूतों से बात कर रहे हैं जिसमें वह उन भारतीय नागरिकों के लिए ‘तत्काल सुरक्षित मार्ग’ की भारत की मांग को दोहराएंगे।

जरूरी है कि रूस और यूक्रेन सुरक्षित मार्ग की हमारी आवश्यकता पर तत्काल प्रतिक्रिया दें। खबरों के मुताबिक यूक्रेन में फंसे भारतीयों को भारतीय दूतावास से आवश्यक सहयोग नहीं मिल पा रहा है। विदेशी धरती पर अपने देश का दूतावास प्रवासियों के लिए घर की तरह होना चाहिए, जहां वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।

लगता है यूक्रेन में भारत का दूतावास इस जिम्मेदारी को निभाने में नाकाम रहा है, ये यूक्रेन में पढ़ने गए भारतीय छात्रों की दुर्दशा बतला रही है। यूक्रेन संकट की मार मध्यमवर्गीय लोगों पर अधिक पड़ी है, क्योंकि वहां पढ़ रहे अधिकतर छात्र इसी वर्ग से हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत, यूक्रेन से अपने हर नागरिक को वापस लेकर आएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच देशों से अभियान के समन्वय एवं देखरेख के लिए चार वरिष्ठ मंत्रियों को दायित्व सौंपा हैं। ये चारों मंत्री किस तरह विद्यार्थियों को सुरक्षित लेकर आते हैं, इसका पता आगामी दिनों में ही चल पाएगा। युद्धरत देश में भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें बाहर निकालना भारत की शीर्ष प्राथमिकता है। देश अपनी इस प्राथमिकता पर कायम है।

भारत ने यूक्रेन में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए 26 फरवरी से अपना अभियान शुरू किया था। अब बचाव अभियान को तेज करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय वायुसेना को आगे आने को कहा है। भारतीय वायुसेना अपने कई सी-17 विमान तैनात करेगी। युद्ध दोनों पक्षों के लिए केवल बर्बादी लाता है। भारत दोनों देशों के बीच शांति बहाली के अपने पक्ष पर अडिग है और यही समय की आवश्यकता है।