भाजपा सरकार ने मणिपुर चुनावों से पहले उग्रवादियों को 15.70 करोड़ रुपये दिये: जयराम रमेश

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 इंफाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बृहस्पतिवार को मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार पर कुछ प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों को 15.70 करोड़ रुपये देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा नीत सरकार के इस कदम का उद्देश्य विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के तहत 28 फरवरी को दो जिलों में स्वतंत्र, …

 इंफाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बृहस्पतिवार को मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार पर कुछ प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों को 15.70 करोड़ रुपये देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा नीत सरकार के इस कदम का उद्देश्य विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के तहत 28 फरवरी को दो जिलों में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव नहीं होने देना सुनिश्चित करना था।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पांच मार्च को होने वाले दूसरे चरण के चुनाव को प्रभावित करने के लिए एक मार्च को 92,65,950 रुपये, अतिरिक्त राशि के तौर पर जारी की गई। कांग्रेस नेता ने ट्वीट किया, ”आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय और मणिपुर की भाजपा सरकार ने ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन’ के तहत 15.70 करोड़ रुपये एक फरवरी 2022 को और 92.7 लाख रुपये एक मार्च को प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों को जारी किये।

इसने चार जिलों में चुनावों का माखौल उड़ाया है !” रमेश ने संवाददाताओं को बताया कि एक फरवरी को दी गई किस्त का उद्देश्य चुराचंदपुर और कांगपोकपी जिलों में मतदान को प्रभावित करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि एक मार्च के भुगतान का उद्देश्य पांच मार्च को तेंगनौपाल और चांदेल जिलों में होने वाले मतदान को प्रभावित करना है।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि राशि गृह मंत्रालय और गृह विभाग से आई। उन्होंने कहा कि यह चुनाव आयोग की आदर्श आचार संहिता का पूरी तरह से उल्लंघन है और यह कुछ और नहीं बल्कि रिश्वत देना तथा भ्रष्टाचार है। उन्होंने कहा यह भाजपा की डबल इंजन सरकार के सिद्धांतों को प्रदर्शित करता है।

यह भुगतान ऐसे वक्त किया गया है जब राज्य सरकार के ज्यादातर कर्मचारियों को दो महीनों से वेतन नहीं मिला है, 18 महीनों से मध्याह्न भोजन के लिए भुगतान नहीं किया गया है। राज्य सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारियों में ज्यादातर को पिछले छह महीने से पेंशन नहीं मिली है। मणिपुर सरकार के अधिकारियों से संपर्क किये जाने की कोशिशों की बावजूद इस पर उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।

रमेश ने यह आरोप ऐसे समय लगाया है ,जब गैर भाजपा दल चुराचंदपुर और कांगपोकपी जिलों में चुनावी धांधली और कई मतदान केंदों पर ईवीएम तोड़े जाने तथा सशस्त्र उग्रवादियों द्वारा दूसरे मतदाताओं के नाम पर वोट डाले जाने के आधार पर पुनर्मतदान कराने की मांग कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने दिन में, पांच विधानसभा क्षेत्रों में 12 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान कराने का आदेश दिया।

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