लखनऊ: राजधानी के लोगों में तेजी से बढ़ रहा अवसाद, डिप्रेशन से बढ़ रहे आत्महत्या के मामले
लखनऊ। कहने को तो राजधानी लखनऊ उत्तर प्रदेश के सबसे विकसित शहरों में शुमार है। पर इन दिनों राजधानी दोहरे चेहरे के साथ जी रही है। एक चेहरा है शहर की रिहायशी खुशहाल आबादी का, पर अब एक नया चेहरा विकसित हो रहा है आर्थिक तंगी और परेशानियों में जी रही जिंदगियों का। इस नए …
लखनऊ। कहने को तो राजधानी लखनऊ उत्तर प्रदेश के सबसे विकसित शहरों में शुमार है। पर इन दिनों राजधानी दोहरे चेहरे के साथ जी रही है। एक चेहरा है शहर की रिहायशी खुशहाल आबादी का, पर अब एक नया चेहरा विकसित हो रहा है आर्थिक तंगी और परेशानियों में जी रही जिंदगियों का। इस नए चेहरे के कारण राजधानी में अवसाद के मामले दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं। इसके कारण आत्महत्याओं का ग्राफ भी दिनों-दिन ऊंचा होता जा रहा है।
एक सप्ताह में 13 आत्महत्याएं
शहर में पिछले एक सप्ताह में 13 आत्महत्याओं के मामले विभिन्न थानों में दर्ज हुए हैं। इनमें से बंथरा में सर्वाधिक तीन मामले दर्ज हुए हैं। इसके अलावा हसनगंज में दो, ठाकुरगंज में दो, गोमतीनगर में दो मामले दर्ज हुए हैं। गत दिनों प्रेम संबंध में एक प्रेमी युगल ने ट्रेन के सामने कूद कर आत्महत्या कर ली। वहीं गत बुधवार ही शहर में आत्महत्या के तीन मामले प्रकाश में आए।
परिवार-रोजगार और इश्क-मुश्क के चक्कर पड़ रहे भारी
शहर के जाने-माने मनोचिकित्सक डॉ. अजय सिंह राजपूत ने बताया कि अवसाद का सबसे बड़ा कारण है हाइपर टेंशन। पारिवारिक विवाद, आर्थिक समस्याएं, प्रेम संबंध, नशे की लत आदि हाइपर टेंशन के प्रमुख कारणों में से एक है। इसके कारण अधिकांश लोग आत्महत्या का प्रयास करते हैं। ऐसे व्यक्ति में कुछ प्रारंभिक व्यवहारिक लक्षण दिखते हैं, जैसे परेशान रहना, चिड़चिड़ापन, एकाकीपन आदि। इन लक्षणों को पहचान कर व्यक्ति को आत्महत्या करने से रोका जा सकता है।
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