शाहजहांपुर: प्रगट भए रे चारो भइया … अवधपुर बाजे बधइया
शाहजहांपुर,अमृत विचार। मुमुक्षु अमृत महोत्सव के अंतर्गत एसएस कालेज मैदान पर चल रही श्रीराम कथा का बृहस्पतिवार को समापन हो गया। अंतिम दिन कथा व्यास संत विजय कौशल महाराज ने श्रीराम जन्म प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को आनंदित किया। राम जन्म पर कथा व्यास और उनकी टीम द्वारा गाई गई संगीतमय बधाई गीत पर महिलाएं और …
शाहजहांपुर,अमृत विचार। मुमुक्षु अमृत महोत्सव के अंतर्गत एसएस कालेज मैदान पर चल रही श्रीराम कथा का बृहस्पतिवार को समापन हो गया। अंतिम दिन कथा व्यास संत विजय कौशल महाराज ने श्रीराम जन्म प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को आनंदित किया। राम जन्म पर कथा व्यास और उनकी टीम द्वारा गाई गई संगीतमय बधाई गीत पर महिलाएं और पुरुष झूम उठे और उन्होंने व्यास पीठ के समक्ष जमकर नृत्य किया।
इस दौरान श्रोताओं ने टॉफी, मिठाई आदि लुटाकर खुशियां मनाईं। अंतिम दिन श्रोताओं को उपदेशित करते हुए कथा व्यास ने कहा कि भगवान सृष्टि के कण-कण में व्याप्त हैं, उन्हें खोजना नहीं पड़ता, बल्कि जरूरत पर पुकारना पड़ता है।
कथा व्यास संत विजय कौशल महाराज ने श्रोताओं से खचाखच भरे पंडाल में मंगलाचरण के साथ संकीर्तन से बुधवार की कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि राजा दशरथ पुत्र प्राप्ति के लिए बेचैन हो रहे थे।
वह गुरू के चरणों में मस्तक झुकाकर अपनी बात कहने लगे। वैसे तो अवध में महाराजा दशरथ से लेकर सभी घरों में आनंद-मंगल था। दशरथ अपनी तीनों रानियों को अतिशय प्रेम करते थे। कथा व्यास ने कहा कि पत्नी को पति के अनुकूल रहना चाहिए और पति का कर्तव्य है कि वह पत्नी को अतिशय प्रेम करे।
अन्यथा घर में क्लेश रहता है। दशरथ को कोई पुत्र नहीं था, जिस कारण वह परेशान रहते थे। परेशानी का हल निकालने के लिए ही वह गुरू के चरणों में गए। इसका आशय यह है कि गुरू ही सभी प्रकार की परेशानियां हल करने में सक्षम होता है। श्रृंगी ऋषि ने राजा दशरथ को धैर्य धारण करने को कहा और कहा कि उनके यहां एक नहीं, चार पुत्र जन्म लेंगे। स्वयं प्रभु उनके यहां जन्म लेने आ रहे हैं।
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