युद्ध की आंच
रूस और यूक्रेन युद्ध को एक सप्ताह बीत गया। रूस के खिलाफ दुनिया के अधिकतर देश लामबंद हैं। रूस पर लगाए गए पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की आंच आम आदमी महसूस करने लगा है। न्यूयॉर्क में, 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने रूस से आक्रमण को रोकने और सैनिकों को वापस बुलाने की मांग करने …
रूस और यूक्रेन युद्ध को एक सप्ताह बीत गया। रूस के खिलाफ दुनिया के अधिकतर देश लामबंद हैं। रूस पर लगाए गए पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की आंच आम आदमी महसूस करने लगा है। न्यूयॉर्क में, 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने रूस से आक्रमण को रोकने और सैनिकों को वापस बुलाने की मांग करने के लिए मतदान किया।
141 देशों ने प्रस्ताव का समर्थन कर एकजुटता दिखाई जबकि 5 देशों ने यूक्रेन से रूसी सेना हटाने के प्रस्ताव के विरुद्ध वोट किया। उधर अमेरिका चाहता है कि भारत युद्ध पर स्पष्ट रुख अपनाए। अमेरिका उम्मीद जता रहा है कि यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद भारत स्वयं को रूस से दूर कर लेगा।
दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों के लिए अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लु ने कहा है कि रूस को जिस तरह से आलोचना का सामना करना पड़ा है, उससे भारत को समझ आएगा कि अब मास्को से दूरी बनाने का समय आ गया है। लु की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब भारत को संयुक्त राष्ट्र में मतदान से दूर रहने को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों ही दलों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
जबकि भारत इस संघर्ष के कूटनीतिक समाधान की संभावना के मार्ग खुले रखना चाहता हैं। वैसे भी भारत के हजारों छात्र अभी भी यूक्रेन में हैं , इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए यूक्रेन और रूस दोनों के साथ मिलकर भारत काम कर रहा है।
रूसी बलों ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमला शुरू किया था।
पुतिन ने यूक्रेन हमले को उचित करार देते हुए कहा कि पूर्वी यूक्रेन के रूस समर्थित अलगाववादी क्षेत्र में जनसंहार की प्रतिक्रिया में ऐसा किया गया। उन्होंने नाटो के विस्तार की मंशा को भी इसके लिए उत्तरदायी ठहराया। पश्चिम को चिंतित करने वाला मुद्दा,यह है कि क्या रूस सोवियत संघ को फिर से बनाने की कोशिश करेगा।
उधर युद्ध के बुरे परिणाम का असर रूस में नजर आ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक रूस में भुगतान तंत्र काम नहीं कर रहा है। रूस की मुद्रा रूबल को विदेशी मुद्रा में बदलने में मुश्किलें आ रही हैं। एटीएम के बाहर लंबी लाइनें हैं। यह निश्चित रूप से रूस की अर्थव्यवस्था व बैंकिंग व्यवस्था के लिए आघात है।
खाने पीने के सामान के दाम भी बढ़ने लगे हैं। गौरतलब है कि वहां भी बड़ी संख्या में लोग युद्ध के खिलाफ हैं और इसे रोकने के लिए सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। युद्धोपरांत स्थिति मे संतुलन बनाना एक कठिन चुनौती होता है,इसलिए अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त कदम उठाए जाने चाहिए।
