रुद्रपुर: जिले में भाजपा की रार को किच्छा विधायक शुक्ला ने दी हवा

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अभिषेक आनंद, अमृत विचार, रुद्रपुर। विधानसभा चुनाव में भाजपा के अंदर छिड़ी रार को किच्छा विधायक राजेश शुक्ला ने हवा दे दी है। माना जा रहा है कि अब मतगणना के करीब आते-आते भाजपा में और भी ज्यादा भितरघात की खबरें जोर पकड़ेंगी। विधानसभा चुनाव में भाजपा के अंदर घमासान की खबरें कोई नई नहीं …

अभिषेक आनंद, अमृत विचार, रुद्रपुर। विधानसभा चुनाव में भाजपा के अंदर छिड़ी रार को किच्छा विधायक राजेश शुक्ला ने हवा दे दी है। माना जा रहा है कि अब मतगणना के करीब आते-आते भाजपा में और भी ज्यादा भितरघात की खबरें जोर पकड़ेंगी।

विधानसभा चुनाव में भाजपा के अंदर घमासान की खबरें कोई नई नहीं हैं लेकिन अनुशासन के चलते यह बहुत ज्यादा सार्वजनिक नहीं हो पाती हैं। विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण के बाद सबसे ज्यादा सिर-फुटव्वल भी भाजपा में ही हुई। चुनाव में जमकर भितरघात हुआ। पूरे उत्तराखंड की बात करें तो सबसे पहले ऊधमसिंह नगर के ही काशीपुर विधानसभा से भितरघात की बातें सार्वजनिक हुईं।

काशीपुर विधायक हरभजन सिंह चीमा ने भितरघात को लेकर पीड़ा जाहिर की। इसके बाद कई विधायकों ने मीडिया में आकर अपना दर्द बयां किया। इससे भाजपा काफी असहज हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सार्वजनिक तौर पर विधायकों को पार्टी फोरम पर ही बात रखने की सलाह दी, लेकिन सिलसिला रुका नहीं।

अब किच्छा विधायक राजेश शुक्ला ने देहरादून में भाजपा नेतृत्व के सामने पार्टीजनों की शिकायत कर एकाएक फिर से इस प्रकरण को सुर्खियों में ला दिया है। शुक्ला का आरोप है कि पार्टीजनों ने किच्छा में निर्दलियों का समर्थन किया। हालांकि, उन्होंने किसी प्रत्याशी का नाम तो नहीं लिया लेकिन यह बात साफ है कि भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़ने वाले अजय तिवारी ने ही पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। किच्छा विधानसभा में आने वाले पूर्वांचल के गांवों में भाजपा के लिए एकतरफा माहौल रहता था लेकिन तिवारी ने यहां पर अपनी घुसपैठ के चलते भाजपा को जबर्दस्त नुकसान पहुंचाया है।

भाजपा का एक खेमा रहा नदारद
किच्छा विधायक व भाजपा प्रत्याशी राजेश शुक्ला का दर्द यूं ही नहीं है। दरअसल, भाजपा का एक धड़ा चुनाव में पूरी तरह से नदारद रहा। आरोप तो यह है कि इसी धड़े ने अंदरखाने निर्दलीय प्रत्याशी को चुनाव लड़ाया। बताया तो यहां तक जा रहा है कि ये लोग निर्दलीय प्रत्याशी के साथ थे। भाजपा नगर मंडल महामंत्री भूपेंद्र नेगी अपने साथियों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गये थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा में किस कदर खेमेबाजी हावी रही।
अभी और भी प्रत्याशी कर सकते हैं शिकायत
2017 में ऊधमसिंह नगर से भाजपा के आठ विधायक जीते थे। इस आंकड़े में परिवर्तन आना निश्चित है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो जिले में इस बार परिणाम भाजपा के लिहाज से अनुकूल रहने वाले नहीं है। इसका एक बड़ा कारण भितरघात भी है। रुद्रपुर में भी भाजपा के सामने यही दिक्कत रही थी। नानकमत्ता, गदरपुर में भी शिकायतों की भरमार हैं। इसके चलते अभी और भी भाजपा प्रत्याशी अपनी पीड़ा को हाईकमान के सामने रख सकते हैं।

भाजपा प्रत्याशी बड़े नेता हैं। उन्होंने पांच साल पहले मुख्यमंत्री को चुनाव हराया था। संगठन व भाजपा प्रत्याशी को लगता था कि उनके कद के आधार पर चुनाव जीत लिया जाएगा। मुझे भाजपा पदाधिकारियों ने नहीं उन बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं ने चुनाव लड़ाया जिनकी निष्ठा पर शक किया गया था। अब खुद की हार सामने देख भाजपा प्रत्याशी ऐसे बयान दे रहे हैं।
– अजय तिवारी, निर्दलीय प्रत्याशी, किच्छा विधानसभा

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