हल्द्वानी: जीएसटी सरलीकरण पर सरकार नहीं दे रही ध्यान – गोल्डी

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हल्द्वानी, अमृत विचार। जीएसटी लगने के बाद सरलीकरण और व्यापारिक सुविधाओं ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जीएसटी लगाने से पहले भी राज्यों की पर्याप्त सहमति नहीं ली गई। आंकड़े बताते हैं कि सरकार पिछले छह माह में एक करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी संग्रह प्रतिमाह वसूल रही है। इसके बाद भी व्यापारियों की …

हल्द्वानी, अमृत विचार। जीएसटी लगने के बाद सरलीकरण और व्यापारिक सुविधाओं ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जीएसटी लगाने से पहले भी राज्यों की पर्याप्त सहमति नहीं ली गई। आंकड़े बताते हैं कि सरकार पिछले छह माह में एक करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी संग्रह प्रतिमाह वसूल रही है। इसके बाद भी व्यापारियों की समस्याओं के निस्तारण में उसका ध्यान नहीं है।

यह बातें व्यापार मंडल हल्द्वानी के जीएसटी प्रदेश प्रभारी डॉ. प्रमोद अग्रवाल गोल्डी ने कही। उन्होंने बताया कि करोड़ रुपये प्रतिमाह जीएसटी वसूलने के बाद भी व्यापारिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो जीएसटी में सरलीकरण और व्यापारिक सुविधाओं के नाम पर नगण्य प्रयास किए गए।

छोटी मोटी भूल चूक अथवा गलती होने के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न, चालान, भारी जुर्माना आदि के आंकड़े आरटीआई के में गवाही दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सों में विलंब होने पर व्यापारियों पर जुर्माने की धनराशि काफी अधिक है। इस पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाना चाहिए। क्योंकि जीएसटी की जटिलता, इंटरनेट की परेशानी के कारण व्यापारी मासिक विवरण अर्थात नक्शे सरलता के साथ उचित समय पर जमा नहीं कर पाते हैं।

वर्तमान में जीएसटी सरकार का सबसे अधिक राजस्व प्रदान करने वाला साधन बन चुका है। बार-बार जीएसटी की दरों में, नियमों में परिवर्तन भी व्यापारी एवं उद्योगपतियों को परेशान कर रहे हैं। जीएसटी की आगामी होने वाली बैठक में परिवर्तन किए जाने की संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि पांच प्रतिशत की दर में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए।

जीएसटी की दरों में यदि सरकार परिवर्तन करना चाहती है वह आगामी माह की पहली तारीख से किया जाना चाहिए। इससे व्यापारी, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कर विशेषज्ञ एवं व्यापारी आदि सभी को परिवर्तन को समझने और हिसाब किताब को रखने में सुविधा रहती है। इस बात का स्थाई प्रयास किया जाए कि जीएसटी में जो भी परिवर्तन हो वह साल में केवल चार बार, तिमाही आधार पर किए जाएं।

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