बातचीत से हल

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Edited By Amrit Vichar
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रूस और यूक्रेन के बीच तीसरे दौर की वार्ता से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दोनों देशों के राष्ट्रपतियों से बात की है। पुतिन और मोदी के बीच बातचीत ऐसे समय में हुई है जब रूस ने नागरिकों की निकासी के लिए संघर्ष-विराम के साथ कई क्षेत्रों में मानवीय गलियारों को खोलने की …

रूस और यूक्रेन के बीच तीसरे दौर की वार्ता से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दोनों देशों के राष्ट्रपतियों से बात की है। पुतिन और मोदी के बीच बातचीत ऐसे समय में हुई है जब रूस ने नागरिकों की निकासी के लिए संघर्ष-विराम के साथ कई क्षेत्रों में मानवीय गलियारों को खोलने की घोषणा की। साथ ही चीन के विदेश मंत्री की ओर से कहा गया है कि हम ‘जरूरी मध्यस्थता’ करने को तैयार हैं।

रूस ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों के अनुरोध के बाद सोमवार को यूक्रेन में फंसे विदेशियों के लिए मानवीय गलियारे खोलने के लिए संघर्ष विराम की घोषणा की। युद्ध के 12 वें दिन सामने आया यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध पर इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) में सुनवाई जारी है। रूस ने सुनवाई का बहिष्कार किया है।

यूक्रेन ने रूस पर झूठे तरीके से जनसंहार का आरोप लगाने, और उसकी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को चोट पहुंचाने और सैन्य हमला करने के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से बात की।

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध आरंभ होने के बाद मोदी और पुतिन के बीच यह तीसरी और जेलेंस्की से दूसरी बार बात हुई है। युद्धग्रस्त देश के पूर्वोत्तर इलाके के शहर सूमी में अभी भी 700 के करीब भारतीय छात्र फंसे हुए हैं। भारत यूक्रेन से छात्रों समेत अपने नागरिकों को निकालने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।

भारत ने दोनों देशों के शीर्ष नेताओं से युद्ध को तत्काल समाप्त कर, वार्ता और कूटनीति के जरिए मतभेदों को दूर करने की अपील की है। प्रधानमंत्री का तत्काल हिंसा समाप्त करने का आह्वान इस बात को रेखांकित करता है कि भारत हमेशा ही दोनों पक्षों के बीच सीधी वार्ता और मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर रहा है। यही बात संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी भारत ने कही थी। तय है कि भारत शांति प्रयासों के लिए आगे बढ़ने को तैयार है।
प्रधानमंत्री मोदी ने युद्ध और इसके परिणामस्वरूप पैदा हुए मानवीय संकट पर भी चिंता जताई। भारत शुरु से ही रूस और यूक्रेन के शीर्ष नेताओं से युद्ध समाप्त कर, वार्ता और कूटनीति के जरिए मतभेदों को दूर करने की अपील करता आ रहा है। युद्ध में पलड़ा चाहे जिसका भी भारी हो, सबसे अधिक संकट आम लोगों के लिए होता है। इस युद्ध में अगर भारत की बातचीत से कोई हल निकलता है तो इसका दुनिया में खासा प्रभाव पड़ेगा।