हरदोई: प्रकृति की कोख बचाने के लिए हाईकोर्ट पहुंचा इनरव्हील क्लब

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हरदोई। स्त्री प्रकृति का प्रतिरूप होने से पर्यावरण-सृजन के प्रति अधिक संवेदनशील है। यह सिद्ध कर दिखाया है जिले में सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय इनरव्हील क्लब ने जिसने एक रिट याचिका के माध्यम से साण्डी पक्षी विहार की अनदेखी और झील के सिकुड़ते जलस्रोतों के दर्द को हाईकोर्ट के सामने रखा। जिले की अधिवक्ता ऐश्वर्या …

हरदोई। स्त्री प्रकृति का प्रतिरूप होने से पर्यावरण-सृजन के प्रति अधिक संवेदनशील है। यह सिद्ध कर दिखाया है जिले में सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय इनरव्हील क्लब ने जिसने एक रिट याचिका के माध्यम से साण्डी पक्षी विहार की अनदेखी और झील के सिकुड़ते जलस्रोतों के दर्द को हाईकोर्ट के सामने रखा।

जिले की अधिवक्ता ऐश्वर्या मिश्र की बहस को सुनकर न्यायमूर्ति डीके उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति फैज आलम ने अगली सुनवाई 12 अप्रैल को हरदोई के डीएम और जिला वन अधिकारी को पक्षी विहार वह झील की  स्थिति स्पष्ट करने को उपस्थित होने के आदेश दिए हैं।

याचिकाकर्ता इनरव्हील क्लब के वकील शैलेन्द्र कुमार मिश्र व अनुराग नारायण श्रीवास्तव द्वारा दायर याचिका पर जिले की नवोदित अधिवक्ता ऐश्वर्या मिश्र ने बहस के दौरान वन्यजीव अभयारण्य के लिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर बल दिया। कहा कि 3084 वर्ग किलोमीटर में फैली झील से जुड़े साण्डी पक्षी विहार में देश दुनिया के अनेक दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी कलरव करने और अपनी संतति क्रम के लिए प्रवास करने आते हैं।

अधिवक्ता ऐश्वर्या मिश्र ने कहा कि शासन-प्रशासन की उपेक्षा के चलते झील की नमी सूख और सिकुड़ रही है। जिससे वन्य जीवों के स्वाभाविक प्रवास पर संकट है और असुरक्षा भी। कहा प्राकृतिक जलस्रोतों को बचाने के लिए शासन स्तर से अधिक और अतिरिक्त प्रयास होना जरूरी है।

पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन विषयक याचिका को उच्च न्यायालय ने गम्भीरता से लिया तो शासन के अधिवक्ता की ओर से पूरे प्रकरण पर वन्य विभाग से जानकारी प्राप्त करने का अनुरोध किया। तो न्यायमूर्तियों ने 12 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर डीएम हरदोई एवं वन अधिकारी को उपस्थित होने के आदेश दिए हैं। इससे याचिकाकर्ता इनरव्हील क्लब की चार्टर प्रेसिडेंट श्रीमती चित्रा बाजपेई  व अध्यक्ष पूजा जैन व अन्य पदाधिकारियों ने संतोष जताया कि उनके प्रयास सफल हुए और अब झील के जलस्रोतों को नवीनता मिल सकेगी।

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