हल्द्वानी: उत्तराखंड में टूटा ‘एक बार जीत-एक बार हार’ का मिथक

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अंकुर शर्मा, अमृत विचार, हल्द्वानी। हल्द्वानी। इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उत्तराखंड की जनता का मिजाज भांपने में विफल रही। जनता ने कांग्रेस को हार का जोरदार झटका दिया तो सत्ताधारी दल भाजपा ने विधानसभा चुनावों में लगातार दूसरी बार बहुमत से जीत दर्ज कर प्रदेश की राजनीति में नया इतिहास बना दिया है। …

अंकुर शर्मा, अमृत विचार, हल्द्वानी। हल्द्वानी। इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उत्तराखंड की जनता का मिजाज भांपने में विफल रही। जनता ने कांग्रेस को हार का जोरदार झटका दिया तो सत्ताधारी दल भाजपा ने विधानसभा चुनावों में लगातार दूसरी बार बहुमत से जीत दर्ज कर प्रदेश की राजनीति में नया इतिहास बना दिया है। साथ ही भाजपा ने प्रदेश के राजनैतिक मिथक ‘एक बार जीत-एक बार हार’ को ध्वस्त कर दिया है।

प्रदेश में आठ जनवरी को चुनावी बिगुल फुंकने के साथ ही 70 विधानसभा सीटों पर भाजपा-कांग्रेस में घमासान शुरू हो गया था। कांग्रेस जहां पहाड़ में पलायन, लचर स्वास्थ्य व शिक्षा सेवा, खस्ताहाल सड़क, बेरोजगारी तो तराई में किसान आंदोलन जैसे मुद्दे के जरिए मैदान में थी। पेट्रोल, सरसों के तेल की बढ़ती कीमतों पर जनता के विरोध ने एक बार तो भाजपा में भी बेचैनी पैदा कर दी थी।

खुद भाजपा के पदाधिकारी भी दबी जुबान से जनादेश विपरीत जाने की बात कर रहे थे। वहीं, कार्यक्रमों में उमड़ती भीड़ और नेताओं को मिलते जनसमर्थन से कांग्रेस जीत के प्रति आश्वस्त मानी जा रही थी। हालांकि भाजपा का संगठन लगातार जनता के बीच में था। राज्य में 14 फरवरी को मतदान संपन्न हुआ। यह पहली बार था कि मतदाता बेहद शांत था।

भाजपा, कांग्रेस, आप सभी दलों के राजनैतिक दिग्गज मतदाताओं के इस शांति के मिजाज को भांप नहीं पा रहे थे। इधर, 10 मार्च को आए नतीजों ने साफ कर दिया कि जनता में एक अंडर करंट था। इस अंडर करंट को कांग्रेस, राजनैतिक जमीन की तलाश में आई आम आदमी पार्टी भी नहीं भांप सकी और भाजपा ने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई।

ये रहे असफलता के कारण
राजनैतिक जानकारों की मानें तो कांग्रेस जनमुद्दों को आंदोलन बनाने से लेकर अपने संगठन को जमीन पर उतारने, दोनों में ही फेल रही। इस वजह से भारी एंटी इंकंबैंसी होने के बाद भी कांग्रेस सत्ता में आने से चूक गई।
– कांग्रेस तराई-भाबर में किसान आंदोलन को मुद्दा बनाने और भुनाने दोनों में ही असफल रही
– पर्वतीय जिलों में पलायन, बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दों को भी जनता तक पहुंचाने में रही नाकाम
– भाजपा के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चेहरा है, जबकि कांग्रेस के पास एक चेहरे की कमी खली
– भाजपा ने स्टार प्रचारकों गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान आदि को प्रचार में उतार दिया था जबकि कांग्रेस कुमाऊं में राहुल गांधी का एक दौरा भी नहीं करवा सकी।
– भाजपा-कांग्रेस का सबसे बड़ा अंतर संगठन की सक्रियता, इस चुनाव में भी दिखाई दी। संगठन ने जमीन पर उतरने के बजाय बड़े नेताओं को चेहरा दिखाने में समय और मेहनत की
– कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने पहले दौरे में ही ‘मेरा बूथ-मेरा गौरव’ का मंत्र दिया था लेकिन इस मंत्र पर काम नहीं किया

कांग्रेस के ये दिग्गज भी नहीं बचा सके अपनी सीट
प्रदेश में अंडर करंट की स्थिति यह थी कि कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे हरीश रावत, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत व जीतराम, संजीव आर्य, उप नेता प्रतिपक्ष करण माहरा समेत कई दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा।

कांग्रेस संगठन पूरी तरह हतप्रभ है। महंगाई, पलायन, किसान आंदोलन, सरकारी कर्मी समेत सभी लोग परेशान थे। भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला है, इसको लेकर हैरान हैं। परिणाम आशा के विपरीत आए हैं। जनता ने भाजपा को क्यों वोट दिया है इसको लेकर चिंतन की जरूरत है। -दीपक बल्यूटिया, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस

जनता ने भाजपा के पांच साल के विकास कार्यों के रिपोर्ट कार्ड पर मुहर लगाई है। भाजपा शुरुआत से बहुमत का दावा कर रही थी। बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक के पदाधिकारी धरातल पर काम कर रहे थे। इस वजह से भाजपा ने प्रदेश में एक बार फिर पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई है। -प्रकाश रावत, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा

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