काशीपुर: पिछले पांच वर्षों में 52 एचआईवी संक्रमित मरीज मिले

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अरुण कुमार, अमृत विचार, काशीपुर। सरकार व स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम चलाने के बाद भी एड्स पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। पांच वर्षों में अब तक एचआईवी संक्रमितों की संख्या घटने के बजाए बढ़कर 52 पहुंच चुकी है। दरअसल देश में एड्स की रोकथाम के लिए नार्को व एनएचएम समेत …

अरुण कुमार, अमृत विचार, काशीपुर। सरकार व स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम चलाने के बाद भी एड्स पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। पांच वर्षों में अब तक एचआईवी संक्रमितों की संख्या घटने के बजाए बढ़कर 52 पहुंच चुकी है।

दरअसल देश में एड्स की रोकथाम के लिए नार्को व एनएचएम समेत स्वास्थ्य विभाग निरंतर काम कर रहा है, बावजूद इसके एचआईवी संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। जबकि सरकारी अस्पतालों में खुले केंद्रों में निशुल्क जांच व इससे बचाव को लेकर परामर्श भी दिया जा रहा है। साथ ही लोगों को जागरूक करने के लिए सामाजिक संस्था भी काम कर रही हैं, लेकिन इस गंभीर और लाइलाज बीमारी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

यह हम नहीं कह रहे हैं, सरकारी अस्पताल से मिले आंकड़े बता रहे हैं। वर्ष 2017 में 6607 लोगों की जांच हुई। इसमें 12 मरीज एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। वर्ष 2018 में 5903 लोगों की जांच में 15, वर्ष 2019 में 6330 लोगों की जांच में 16, वर्ष 2020 में 3912 लोगों की जांच में 11, वर्ष 2021 में 4510 लोगों की जांच में 24 और जनवरी 2022 में 325 लोगों की जांच में दो मरीज एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2020 में सबसे कम 11 मरीज, जबकि वर्ष 2021 में सबसे अधिक 24 मरीज एचआईवी के पाए गए। साथ ही इस वर्ष अन्य वर्षों की अपेक्षा लोगों की जांच भी कम हुई है।

नहीं तो यह आंकड़ा शायद और बढ़ सकता था। एलडी भट्ट सरकारी अस्पताल के एकीकृत परामर्श परीक्षण केंद्र (आईसीटीसी) केंद्र प्रभारी डॉ. मनु पांडेय ने बताया कि केंद्र में जांच के साथ एचआईवी से सचेत रहने, सावधानी बरतने आदि की सलाह दी जाती है। इसके अलावा अस्पताल परिसर स्थित ओएसटी केंद्र में इंजेक्शन से नशा करने वाले युवाओं को नशा छोड़ने के लिए दवाइयां व जागरूक करने का काम कर रहा है। इतना सब कुछ होने के बाद भी एचआईवी पर अंकुश लगने के बजाए क्षेत्र में तेजी से पैर पसार रहा है।

इन कारणों से एड्स होने की आशंका
काशीपुर। एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध बनाने से, एचआईवी संक्रमित सिरिंज का प्रयोग करने, एचआईवी संक्रमित मां से शिशु को जन्म से पूर्व, प्रसव के समय या प्रसव के शीघ्र बाद, एचआईवी संक्रमित अंग प्रत्यारोपण से, बिना जांच किया हुआ रक्त ग्रहण करने आदि से एड्स होने की आशंका रहती है।

एड्स बचाव के कुछ बिंदू
जीवनसाथी के अलावा किसी अन्य से यौन संबंध नहीं रखे।
यौन संपर्क के समय सुरक्षित सामग्री का प्रयोग करें।
दूसरों पर प्रयोग की गई सिरिंज व सूई का प्रयोग न करें।
एड्स पीड़ित महिलाएं गर्भधारण न करें, क्योंकि उनके उत्पन्न होने वाली संतान को यह रोग हो सकता है।
जरूरतमंद व्यक्ति को एचआईवी जांच के बाद ही रक्त चढ़वाएं।

एचआईवी की रोकथाम के लिए नार्को, एनएचएम समेत स्वास्थ्य विभाग निरंतर काम कर रहा है। आईसीटीसी केंद्र में इसकी रोकथाम के लिए परामर्श भी दिया जा रहा है। । फिर भी क्षेत्र में मरीज बढ़ रहे हैं तो इसकी रोकथाम के लिए आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

– डॉ. मनु पांडेय, प्रभारी, आईसीटीसी केंद्र, एलडी भट्ट सरकारी अस्पताल, काशीपुर

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