सुरक्षाबलों की चुनौती

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Edited By Amrit Vichar
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पाकिस्तान के भारत-विरोधी मनसूबे जगजाहिर हैं। वह जम्मू कश्मीर में शांति भंग करने पर आमादा है। वह घुसपैठियों और आतंकवादियों के जरिए भारत को अस्थिर करने की कोशिश से बाज नहीं आ रहा है। पाकिस्तान नहीं चाहता कि कश्मीर घाटी में लोकतांत्रिक प्रक्रिया या विकास जारी रहे। इसलिए पाक समर्थित आतंकवादी पंचों, सरपंचों को निशाना …

पाकिस्तान के भारत-विरोधी मनसूबे जगजाहिर हैं। वह जम्मू कश्मीर में शांति भंग करने पर आमादा है। वह घुसपैठियों और आतंकवादियों के जरिए भारत को अस्थिर करने की कोशिश से बाज नहीं आ रहा है। पाकिस्तान नहीं चाहता कि कश्मीर घाटी में लोकतांत्रिक प्रक्रिया या विकास जारी रहे। इसलिए पाक समर्थित आतंकवादी पंचों, सरपंचों को निशाना बना रहे हैं।

घाटी में दस दिन के भीतर दो सरपंचों और एक पंचायत प्रतिनिधि की हत्या चिंता का विषय है। हालांकि आतंकवादियों को पाकिस्तान की ओर से मिलने वाली शह और संरक्षण से निपटने के लिए भारतीय सुरक्षा बल हमेशा चौकस रहते हैं और वे मोर्चा लेने के लिए काफी हैं। सुरक्षाबलों ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर शहर के बाहरी इलाके में प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े तीन आतंकवादियों को मार गिराया।

ये शहर के खोनमोह इलाके में 9 मार्च को हुई एक सरपंच की हत्या में शामिल थे। ये तीनों लश्कर-ए-तैयबा के स्थानीय आतंकवादी थे। सेना और सुरक्षा बलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब स्थानीय स्तर पर आतंकियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने की है।
आतंकी संगठनों ने स्थानीय स्तर पर अपना जाल फैला लिया है और इनके संगठन गांव-गांव तक फैले होने की बातें भी सामने आती ही रही हैं।

स्पष्ट है कि आतंकी संगठन अभी भी नौजवानों को शामिल कर रहे हैं। पिछले सप्ताह पुलवामा और कुपवाड़ा में हुई मुठभेड़ों में भी जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकवादी मारे गए। इनके साथ एक और जो शख्स मारा गया, उसकी पहचान एक पाकिस्तानी नागरिक के तौर पर हुई। इससे साफ है कि घाटी में घुसपैठ अभी भी हो रही है।

पिछले दिनों अमेरिकी विदेश विभाग की एक रिपोर्ट से इस बात का खुलासा हुआ था कि आतंकवादी संगठन पाकिस्तान की जमीन से अपनी गतिविधियों को संचालित कर भारत को निशाना बना रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया था कि पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक और संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी घोषित किए गए आतंकवादी मसूद अजहर और 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंड साजिद मीर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

पाकिस्तान न सिर्फ ऐसे आतंकियों को पाल रहा है, बल्कि वहां आतंकवादी निडर होकर घूम रहे हैं। चिंता की बात है कि भारत में आईएस के स्लीपर सेल भी सक्रिय हैं। ऐसे में सरकार और सुरक्षाबलों के लिए यह दोहरी चुनौती है कि नौजवानों को आतंकियों के जाल में जाने से बचाया कैसे जाए? उन्हें मुख्यधारा में कैसे लाया जाए?