हल्द्वानी: द कश्मीर फाइल्स, होली और शब-ए-बारात : पुलिस सावधान
सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी, अमृत विचार। कश्मीरी पंडितों की पीड़ा पर लिखी पटकथा द कश्मीर फाइल्स फिल्म चर्चा में है। शुक्रवार को होली है और साथ ही इबादत की रात। कुल मिलाकर माहौल में तल्खी आ सकती है और खुफिया विभाग की रिपोर्ट भी यही है। संभावना है कि अराजकतत्व कुमाऊं के कुछ जिलों में माहौल को …
सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी, अमृत विचार। कश्मीरी पंडितों की पीड़ा पर लिखी पटकथा द कश्मीर फाइल्स फिल्म चर्चा में है। शुक्रवार को होली है और साथ ही इबादत की रात। कुल मिलाकर माहौल में तल्खी आ सकती है और खुफिया विभाग की रिपोर्ट भी यही है। संभावना है कि अराजकतत्व कुमाऊं के कुछ जिलों में माहौल को और तल्ख बनाने की फिराक में हैं। इसके लिए सोशल मीडिया का सहारा लिए जाने का अंदेशा है। बहरहाल, बात घबराने वाली नहीं है, क्योंकि कुमाऊं में पुलिस सतर्क है और दर्जनों अफसर लगातार साइबर पेट्रोलिंग कर रहे हैं।
कुमाऊं के छह जिलों में ऊधमसिंहनगर और नैनीताल जिला सबसे ज्यादा संवेदनशील है, क्योंकि इन्हीं जिलों में सबसे ज्यादा मिश्रित आबादी है। पुलिस द कश्मीर फाइल्स, होली और शब-ए-बारात को लेकर सतर्क है। छह जिलों में पुलिस के पास पहले ही सोशल मीडिया प्रभारी हैं और उनकी टीम है। ये टीम सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर नजर रख रही है। इस काम के लिए कुमाऊं में साइबर सेल भी पूरी तरह सक्रिय है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्वीटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म के यूजर्स कब और क्या पोस्ट कर रहे हैं और पोस्ट पर क्या कमेंट आ रहे हैं, इस पर नजर रखी जा रही है।
पुलिस की सबसे ज्यादा सक्रियता ऊधमसिंहनगर पर है। यहां काशीपुर, रुद्रपुर, गदरपुर, किच्छा और सितारगंज ऐसे इलाके हैं, जहां सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सकता है। इन सभी इलाकों में जमीन पर पुलिस की अच्छी खासी सक्रियता है। जबकि नैनीताल जिले में नैनीताल शहर के अलावा हल्द्वानी, लालकुआं और रामनगर में खुफिया को माहौल बिगड़ने के इनपुट मिले हैं। जबकि चम्पावत, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में इस तरह का अंदेशा कम है। हालांकि पुलिस यहां भी सतर्क है। इधर, नैनीताल और ऊधमसिंहनगर के बाद अल्मोड़ा जिले में भी मिश्रित आबादी है।
सभी जिलों में पुलिस साइबर पेट्रोलिंग कर रही है। होली और शब-ए-बारात को देखते हुए सभी स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल लगाया गया है। हमारी निगरानी ऊधमसिंहनगर पर अधिक है। पीस कमेटी की बैठकें कर एहतियात बरतने के लिए कहा गया है। उन्होंने अपील की है कि लोग फिल्में देखें और त्योहार मनाएं, लेकिन ऐसी कोई प्रतिक्रिया न दें जिससे किसी की भावनाएं आहत हों।
-नीलेश आनंद भरणे, डीआईजी
सांप्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल रहा है नैनीताल
हल्द्वानी। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर नैनीताल जिले में 809,717 लाख हिंदू और 120742 लाख मुस्लिम आबादी है। एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2022 में हिंदुओं की आबादी 939,272 लाख हो चुकी है। जबकि मुस्लिम आबादी 140,061 लाख आंकी जा रही है। हाल ही में विधानसभा चुनाव शांतिपूर्वक तरीके से निपटे और यह नैनीताल जिले का इतिहास रहा है कि इतनी बड़ी मिश्रित आबादी एक होने के बावजूद कभी सांप्रदायिक माहौल खराब नहीं हुआ।
एक मामला आया, माफी मंगवा कर निपटाया
हल्द्वानी। नैनीताल जिले में पुलिस की सोशल मीडिया सेल प्रभारी आरती पोखरियाल हैं। उन्होंने बताया कि पूरे जिले में सोशल मीडिया पर बारीकी से नजर रखी जा रही है और अभी तक ऐसा कोई मामला प्रकाश नहीं आया, जिससे माहौल बिगड़े। वो और उनकी टीम खुद सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक सौहार्द्र बनाए रखने जैसे पोस्ट कर लोगों को जागरुक कर रहे हैं। आरती की मानें तो एक पोस्ट पर आपत्ति दर्ज कराई थी और उसने माफी मांगते हुए पोस्ट डिलीट कर दी।
पनियास्रोत मजार पर जाने की किसी को इजाजत नहीं
हल्द्वानी। रामनगर में पनियास्रोत मजार है और ये मजार कार्बेट रिजर्व में घने जंगल के बीच है। यह इलाका आम लोगों के लिए प्रतिबंधित है। बावजूद इसके मजार तक जाने के लिए उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं और उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। रामनगर थानाध्यक्ष अरुण कुमार सैनी ने बताया कि मीडिया के जरिये लोगों से मजार पर न जाने की अपील कर दी गई है। रामनगर की सीमा पर पुलिस बल तैनात है और मजार क्षेत्र में रेवेन्यू के साथ फॉरेस्ट और पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
पोस्ट को लेकर शिकायत हो तो इस नंबर पर करें सूचित
हल्द्वानी। सोशल मीडिया पर निगरानी केवल कुमाऊं की पुलिस नहीं कर रही, बल्कि राज्य और केंद्र स्तर पर भी इसकी निगरानी की जा रही है। सोशल मीडिया पर किसी भी तरह के आपत्तिजनक पोस्ट पर सख्त कार्रवाई की जाती है। केंद्र की ओर से 1930 ट्रोल फ्री नंबर ऐसी की आपत्तिजनक पोस्ट की शिकायत के लिए जारी किया गया है। इसके अलावा उत्तराखंड पुलिस भी अपना टोल फ्री नंबर पहले ही जारी कर चुकी है। शिकायत के लिए आप उत्तराखंड पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग कर सकते हैं।
