प्रसन्नता रिपोर्ट
प्रसन्न समाज सबसे ज्यादा प्रगति करता है। जो देश सबसे ज्यादा खुशहाल है, वह सबसे ज्यादा आर्थिक उन्नति भी करता है। इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी की गई विश्व प्रसन्नता सूची के अनुसार भारत 146 देशों में से 136 वें स्थान पर है। अच्छी बात है कि सूची में भारत का स्थान पहले से …
प्रसन्न समाज सबसे ज्यादा प्रगति करता है। जो देश सबसे ज्यादा खुशहाल है, वह सबसे ज्यादा आर्थिक उन्नति भी करता है। इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी की गई विश्व प्रसन्नता सूची के अनुसार भारत 146 देशों में से 136 वें स्थान पर है। अच्छी बात है कि सूची में भारत का स्थान पहले से बेहतर रहा है। पिछले वर्ष यह 139 वें स्थान पर था और किसी तरह सबसे दुखी 10 देशों की सूची से बाहर रहा था। सूची कोविड-19 और विश्व की अन्य घटनाओं से लोगों पर पड़ने वाले असर पर ध्यान केंद्रित रखते हुए जारी की गई है।
चिंता की बात है कि इस सूची में पड़ोसी देश पाकिस्तान 121वें और बांग्लादेश 94वें एवं चीन 72 वें स्थान पर रहकर भारत से आगे है। फिनलैंड नंबर एक पर रहा। बताते हैं फिनलैंड में किसी को भी देखो चेहरा हमेशा हंसमुख नजर आता है। स्कूल के प्रोफेसर तथा बच्चों के माता पिता उनसे निराशावादी बातें नहीं करते हैं। इसी से बच्चे आगे चलकर आशावान बनते हैं। फिनलैंड लगातार 5वें साल शीर्ष पर बना हुआ है। रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र स्थायी विकास उपाय नेटवर्क की तरफ से जारी किया गया है। फिनलैंड के बाद डेनमार्क, आइसलैंड, स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड, लक्समबर्ग, नॉर्वे, इज़राइल को शीर्ष स्थान दिया गया है।
गौरतलब है कि बंदूक के जरिए सत्ता परिवर्तन झेल चुके अफगानिस्तान के लोग अपने जीवन से सबसे अधिक अप्रसन्न हैं। उनको सूची में अंतिम पायदान पर जगह मिली है। इसके बाद जिम्बाब्वे (144वें), रवांडा (143वें), बोत्सवाना(142) और लेसोथो का (141वां) स्थान है। इस सूची में अमेरिका को 16वां स्थान मिला है। कुल मिलाकर अफगानिस्तान को छोड़कर भारत के पड़ोसी देशों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। प्रसन्न रहना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।
लेकिन वर्तमान प्रतिस्पर्धा के दौर में तनाव हमारे जीवन का हिस्सा बन चुका है। नौकरी, व्यापार, परिवार, समाज में भिन्न भिन्न कारण इसके कारक रहते है। किन कारणों से तनाव हो रहा है और तनाव कम करने के लिए उचित समाधान अपनाने चाहिए। नकारात्मकता से दूर रहना ही सबसे बेहतर उपाय हो सकता है। किसी भी राष्ट्र का पूर्ण विकास वहां के नागरिकों की मानसिक, शारीरिक एवं भावनात्मक उन्नति व प्रसन्नता से ही संभव है। यदि व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ और खुश है तो निश्चित ही उसकी कार्य क्षमता में वृद्धि होगी। संयुक्त राष्ट्र का भी मानना है कि दुनिया में संधारणीय विकास, गरीबी उन्मूलन, और खुशी के लिए आर्थिक विकास में समानता, समावेशता और संतुलन को शामिल करने की जरूरत है।
