मंडल के लोगों को सरकार में सीधी पैरवी की उम्मीद को लगेगा झटका
आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। अपनी पंसद में भाजपा को हाशिए पर रखने वाले मंडल के लोगों को शासन में मजबूत पैरवी के लिए दूसरों का मुंह देखना पड़ेगा। क्योंकि, मंडल की 27 विधान सभा सीटों में महज 10 क्षेत्रों से ही पार्टी के विधायक जीते हैं। उधर, तीन लोगों को मंत्रिमंडल में जगह मिली है, लेकिन …
आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। अपनी पंसद में भाजपा को हाशिए पर रखने वाले मंडल के लोगों को शासन में मजबूत पैरवी के लिए दूसरों का मुंह देखना पड़ेगा। क्योंकि, मंडल की 27 विधान सभा सीटों में महज 10 क्षेत्रों से ही पार्टी के विधायक जीते हैं। उधर, तीन लोगों को मंत्रिमंडल में जगह मिली है, लेकिन उसमें मंडल मुख्यालय की सीधी भागीदारी नहीं हो पाई है।
वर्ष 2017 के चुनाव में यहां से 14 विधायक जीते थे। जबकि इस बार के चुनाव में यह संख्या सिमटकर 10 रह गयी। मुरादाबाद की छह विधान सभा सीटों में केवल सदर सीट पर रितेश गुप्ता दूसरी बार चुने जा सके। कांठ क्षेत्र के विधायक राजेश कुमार सिंह पराजित हो गए। जबकि भाजपा नेतृत्व ने जिले को लेकर काफी मेहनत की थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पांच साल में 10 बार यहां आए और जन कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी बेहतर कार्य हुआ।
आवास आवंटन यहां के जिम्मेदारों की प्रशंसा का आधार बना था। जबकि अमरोहा के नौगावां सादात से विधायक पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान को मंत्री बनाया गया था। यह अलग बात है कि वह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। कोरोना काल में उनका निधन हो गया। उप चुनाव में उनकी पत्नी संगीता चौहान कड़ी मेहनत के बाद चुनाव तो जीत गयीं। लेकिन पार्टी ने उन्हें फिर मौका नहीं दिया। जबकि बिजनौर के केवल चार विधायक ही जीते हैं।
साल 2017 में पांच विधायक जीते थे। संभल जिले की इकलौती विधायक गुलाब देवी को फिर मंत्रिमंडल में जगह मिली है, जबकि रामपुर के बिलासपुर क्षेत्र के विधायक सरदार बलदेव सिंह औलख अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब हो गए हैं। संगठन में काम को लेकर असरदार माने गए भूपेंद्र सिंह चौधरी को दोबारा मौका मिला है। लेकिन, वह विधान परिषद के सदस्य हैं। उनकी जनता से सीधी जवाबदेही नहीं है।
सूत्रों का कहना है कि भाजपा के एजेंडे में विशेष रहे मुरादाबाद मंडल की जनता ने पार्टी के पक्ष में दरियादिली नहीं दिखायी। दूसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद भी भाजपा को यहां से उम्मीद के अनुसार सफलता नहीं मिली। इसका असर भी सरकार में दिखा है। जानकारों की मानें तो भाजपा को उम्मीद के अनुसार समर्थन नहीं देने वालों को दूसरों के सहारे रहना पड़ेगा। दो टूक यह कि सरकार में मंडल का कमजोर नेतृत्व यहां के विकास और अन्य जरूरी पक्षों पर असर दिखाएगा।
संगठन के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि बिजनौर क्षेत्र के एक घराने को राजनीति में धोखा देने का खमियाजा भुगतना पड़ सकता है। चर्चा थी कि बिजनौर से किसी को मौका मिल सकता है। लेकिन, संगठन के पैमाने पर खरा नहीं उतरना झटका दे गया। ठाकुरद्वारा और बिलारी सीट को लेकर पार्टी के रणनीतिकार कुछ ज्यादा ही भरोसे में थे। दोनों सीटों पर पार्टी को भितरघात से जूझना पड़ा था।
सामाजिक संतुलन में भूपेंद्र, गुलाब और बलदेव की ताजपोशी
विधान परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह चौधरी, चंदौसी की विधायक गुलाब देवी और बिलासपुर के एमएलए सरदार बलदेव सिंह औलख की ताजपोशी को साल 2024 के लोकसभा चुनाव की दृष्टि से अहम माना जा रहा है। भाजपा में जिलाध्यक्ष, प्रदेशीय सदस्य और क्षेत्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा चुके भूपेंद्र सिंह (पिछड़ा वर्ग) जाट समाज से आते हैं। वह कभी सपा के मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव के खिलाफ लोकसभा चुनाव भी लड़े, जबकि पार्टी के लिए लंबी लड़ाई लड़ने वाले भूपेंद्र संगठन के कई प्रमुख लोगों की विशेष पसंद भी हैं। गुलाब देवी अनुसूचित समाज से आती हैं। जबकि, सरदार बदलेव सिंह अल्पसंख्यक हैं। यानी की पार्टी ने सरकार में भागीदारी सुनिश्चित करने के दौरान सामाजिक संतुलन का पूरा ख्याल रखा है। जबकि सामान्य वर्ग की भागीदारी कम होने के पीछे चुनाव परिणाम को कारण माना जा रहा है।
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