गन्ने की औसत पैदावार बढ़ाने के लिए पेड़ी फसल का प्रबंधन बहुत जरूरी, किसानों को दी जानकारी
बहराइच। क्षेत्र में गन्ने की कटाई के बाद अब खेत खाली हो गए हैं। ऐसे में किसान गन्ने की उपज अधिक बढ़ाने के लिए पेड़ी फसल का प्रबंधन करें। बहराइच जिले के साथ कैसरगंज तहसील क्षेत्र में गन्ने की पौधे फसल की कटाई के बाद जब पूरा खेत खाली हो जाये तो उसके तुरंत बाद …
बहराइच। क्षेत्र में गन्ने की कटाई के बाद अब खेत खाली हो गए हैं। ऐसे में किसान गन्ने की उपज अधिक बढ़ाने के लिए पेड़ी फसल का प्रबंधन करें।
बहराइच जिले के साथ कैसरगंज तहसील क्षेत्र में गन्ने की पौधे फसल की कटाई के बाद जब पूरा खेत खाली हो जाये तो उसके तुरंत बाद जो भी सभी सुखी पत्तिया खेत में है, उन्हें बराबर पुरे खेत में समान रूप से फैला दे और सिचाई कर दे। जलाये बिल्कुल नहीं, क्योकि एक एकड़ गन्ने के खेत से लगभग 40 कुंतल सुखी पत्तिया निकल आती हैं।
इन पत्तियों के अंदर सभी प्रकार के पोषक तत्त्व मौजूद रहते हैं और पत्तिया सड़ने के बाद कार्बनिक पदार्थ भी जमीन को भरपूर उपलब्ध कराती है। यदि कही खेत में ठूठ है तो उन्हें जमीन के बराबर कटाई कर दे और उसके बाद 50 किलो यूरिया प्रति एकड़ की दर से लाइन में प्रयोग करे कल्लो का फुटाव बहुत जल्दी और एक समान होगा 15 -20 दिन में सभी पत्तिया सड़कर खाद बन जाएगी उसके बाद 100 किलो एन पी के,10 किलो सल्फोजिंक का प्रयोग प्रति एकड़ की दर से करे और जुताई -गुड़ाई करा दे इससे गन्ने की पैदावार अच्छी होगी और शुद्ध मुनाफा भी बढ़ेगा और क्षेत्र का विकास बहुत तेजी से होगा।
इसलिए सभी किसान खेती को व्यापार मानते हुवे कार्य करे यह सभी बाते पारले कंपनी के एसोसिएट मुख्य गन्ना प्रबंधक संजीव राठी ने क्रय केंद्र पदमपिछोरा, करीमूलापुर, हुजूरपुर, कंदरा , ढेलासमय , छायाकुवा पर भर्मण के दौरान किसानो को बताया। साथ में यह भी कहा की मिल गेट और क्रय केन्द्रो पर साफ़ एवं ताजे गन्ने की आपूर्ति सुनिश्चित करे। इस अवसर पर मिल के अधिकारी सूबेदार, अमरेंद्र , अखंड, अमर, रुचिन और किसान मौजूद रहे।
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