उत्तराखंड की पांचवी विधानसभा का पहला सत्र 29 मार्च से, सरकार के साथ तैयारियों में जुटा विपक्ष

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हल्द्वानी, अमृत विचार। धामी सरकार का वर्तमान विधानसभा का पहला सत्र 29 मार्च से राज्यपाल के अभिभाषण के साथ शुरू होगा। उत्तराखंड की पांचवी विधानसभा का यह सत्र कई मायने से ऐतिहासिक होगा। इस चुनाव में कई मिथक टूटे हैं। विधानसभा सत्र 29 से 31 मार्च तक चलेगा। सरकार के साथ ही विपक्ष भी सत्र …

हल्द्वानी, अमृत विचार। धामी सरकार का वर्तमान विधानसभा का पहला सत्र 29 मार्च से राज्यपाल के अभिभाषण के साथ शुरू होगा। उत्तराखंड की पांचवी विधानसभा का यह सत्र कई मायने से ऐतिहासिक होगा। इस चुनाव में कई मिथक टूटे हैं। विधानसभा सत्र 29 से 31 मार्च तक चलेगा। सरकार के साथ ही विपक्ष भी सत्र की तैयारी में जुटा है। बताते चलें कि 2022 के चुनाव में 70 सीटों में भाजपा ने 47 तो वहीं कांग्रेस को 19 सीटों पर जीत नसीब हो सकी। जबकि दो-दो सीटों पर बसपा और निर्दलीयों ने जीत दर्ज की। हालांकि अभी तक कांग्रेस ने नेता प्रतिपक्ष कौन होगा, इस बात का फैसला नहीं किया है।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने कहा कि वह सत्ता पक्ष व विपक्ष के सभी सदस्यों को साथ लेकर समान अवसर प्रदान करेंगी। जनता की आशाओं और अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए उनका प्रयास लोकतांत्रिक संस्था को सशक्त बनाना होगा। उन्होंने कहा कि नीतियों और कानून के निर्माण तथा जनहित से जुड़े विषयों के लिए सदन को व्यापक चर्चा-संवाद का केंद्र बनाकर ही हम कार्यपालिका पर नियंत्रण रखते हुए जनता का कल्याण कर सकते हैं।

हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश।

ऐसे में विधानसभा सत्र के लिए देहरादून रवाना होने से पहले हल्द्वानी से कांग्रेस के नवनिर्वाचित युवा विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि भले ही कांग्रेस के विधायकों की संख्या 19 हो लेकिन वे सभी मजबूती के साथ सदन में जनता से जुड़े मुद्दों को रखेंगे। सुमित हृदयेश ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि हल्द्वानी की लंबित विकास परियोजनाओं जिनमें आईएसबीटी, जू और रिंग रोड, अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं, उन्हे सदन पर पूरजोर तरीके से रखा जाएगा।

माना जा रहा है कि 2017 की तर्ज पर ही इस बार भी नेता प्रतिपक्ष का चयन विधानसभा सत्र से ऐन पहले किया जाएगा। चौथी विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी ने विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले 26 मार्च, 2017 को नेता प्रतिपक्ष के रूप में डा इंदिरा हृदयेश का चयन किया था। तत्कालीन प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी इस सिलसिले में देहरादून पहुंची थीं। इसके बाद विधायक दल की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया था।

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